तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, श्यामा श्याम गीत (155)

तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, श्यामा श्याम गीत (155)

तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा।
याहि ते बार बार आया तेरे धामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, श्यामा श्याम गीत (155)

हे श्री राधा, आपसे अधिक दया करने वाला एवं करुणामयी न कोई था, है, न होगा, इसीलिए मैं बार-बार आपके निज धाम ब्रज आता हूँ।