प्रेम मंदिर वृंदावनमें लीला कलाकृति,

प्रेम मंदिर वृंदावनमें लीला कलाकृति,

प्रेम मंदिर (दिव्य प्रेम का मंदिर) वृंदावन, मथुरा, भारत में एक हिंदू मंदिर है। यह जगद्गुरु कृपालु जी के द्वारा बनवाया गया है। यह परिसर वृंदावन में 55 एकड़ की साइट पर है। इस मंदिर में श्री राधा कृष्ण की विभिन्न लीलाओं को मूर्तियों एवं चित्रों के माध्यम से बहुत सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। राधा कृष्णा दिव्य लीलाओ के चौरासी खूबसूरत चित्र प्रेम मंदिर की बाहरी दीवारों पर लगाए गये है।
 
मंदिर का समय:
सवेरे 5:00 बजे - मंगला आरती
सवेरे 8:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:00 बजे - राजभोग आरती
शाम 4:30 बजे - संध्या आरती
शाम  8:10 बजे - शयन आरती

  1. इंद्र की क्षमा प्रार्थना : लीला के मध्य, जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और इंद्र के तेज बारिश और क्रोध से सभी ब्रजवासियों को बचाया, इंद्र ने स्वीकार किया कि श्री कृष्ण स्वयं भगवान हैं और इसलिए इंद्र ने श्री कृष्ण से क्षमा मांगी।
    इंद्र की क्षमा प्रार्थना : लीला के मध्य, जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और इंद्र के तेज बारिश और क्रोध से सभी ब्रजवासियों को बचाया, इंद्र ने स्वीकार किया कि श्री कृष्ण स्वयं भगवान हैं और इसलिए इंद्र ने श्री कृष्ण से क्षमा मांगी।
  2. ग्वाल बाल के साथ बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण : वृंदावन में ग्वाल बाल के साथ गाय चराने के मध्य श्रीकृष्ण द्वारा बांसुरी बजाने की सुंदर लीला दर्शायी गयी है। घर लौटने से पहले, वह अपनी बांसुरी की धुन के माध्यम से एक-एक गाय को बुलाते हैं।
    ग्वाल बाल के साथ बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण : वृंदावन में ग्वाल बाल के साथ गाय चराने के मध्य श्रीकृष्ण द्वारा बांसुरी बजाने की सुंदर लीला दर्शायी गयी है। घर लौटने से पहले, वह अपनी बांसुरी की धुन के माध्यम से एक-एक गाय को बुलाते हैं।
  3. श्री राधारानी बांसुरी बजा रही हैं : निकुंज लीला के मध्य जब श्री राधा रानी ने श्री कृष्ण से बांसुरी ली और उसे बजाने की कोशिश कर रही थीं। एक और लीला है जब राधा रानी ललिता और विशाखा की मदद से श्री कृष्ण की बांसुरी चुराती हैं। निधिवन, वृंदावन में एक मंदिर है जो "बंशी चोर राधा रानी" नाम के साथ इस दिव्य लीला का महिमामंडन करता है। युगल सरकार को दर्शाते हुए प्रेम मंदिर की दीवार पर सुंदर लीला चित्रित की गयी है।
    श्री राधारानी बांसुरी बजा रही हैं : निकुंज लीला के मध्य जब श्री राधा रानी ने श्री कृष्ण से बांसुरी ली और उसे बजाने की कोशिश कर रही थीं। एक और लीला है जब राधा रानी ललिता और विशाखा की मदद से श्री कृष्ण की बांसुरी चुराती हैं। निधिवन, वृंदावन में एक मंदिर है जो "बंशी चोर राधा रानी" नाम के साथ इस दिव्य लीला का महिमामंडन करता है। युगल सरकार को दर्शाते हुए प्रेम मंदिर की दीवार पर सुंदर लीला चित्रित की गयी है।
  4. गोवर्धन पूजन : ब्रजवासियों की सुंदर लीला को चित्रित किया गया है, जो श्री कृष्ण के निर्देशानुसार गोवर्धन की पूजा करते हैं। गिरिराज-गोवर्धन मथुरा से लगभग चौदह मील पश्चिम में स्थित है। गोवर्धन राधा रानी को बहुत प्रिय है जैसा कि गर्ग संहिता में उल्लेख किया गया है। "यत्र वृंदावनं नास्ति न यत्र यमुना नदी, यत्र गोवर्धनो नास्ति तत्र में न मनःसुखम" श्री राधा रानी ने कहा: मेरे ह्रदय को उस  स्थान से सुख नहीं है जहां वृंदावन नहीं है, यमुना नदी नहीं, और गोवर्धन पर्वत नहीं। गिरिराज-गोवर्धन कृष्ण से भिन्न नहीं हैं, फिर भी उन्हें हरि-दास माना जाता है, जो हरि के सभी सेवकों में सर्वश्रेष्ठ हैं। गोपियों ने उनके बारे में इस प्रकार कहा: "हे मेरे मित्र, यह गिरिराज श्री हरि के सेवकों में सबसे ऊपर है और परम आनंद में लीन है, जिसे सदैव श्री बलराम और श्री कृष्ण के चरण कमलों द्वारा स्पर्श किया जाता है।
    गोवर्धन पूजन : ब्रजवासियों की सुंदर लीला को चित्रित किया गया है, जो श्री कृष्ण के निर्देशानुसार गोवर्धन की पूजा करते हैं। गिरिराज-गोवर्धन मथुरा से लगभग चौदह मील पश्चिम में स्थित है। गोवर्धन राधा रानी को बहुत प्रिय है जैसा कि गर्ग संहिता में उल्लेख किया गया है। "यत्र वृंदावनं नास्ति न यत्र यमुना नदी, यत्र गोवर्धनो नास्ति तत्र में न मनःसुखम" श्री राधा रानी ने कहा: मेरे ह्रदय को उस स्थान से सुख नहीं है जहां वृंदावन नहीं है, यमुना नदी नहीं, और गोवर्धन पर्वत नहीं। गिरिराज-गोवर्धन कृष्ण से भिन्न नहीं हैं, फिर भी उन्हें हरि-दास माना जाता है, जो हरि के सभी सेवकों में सर्वश्रेष्ठ हैं। गोपियों ने उनके बारे में इस प्रकार कहा: "हे मेरे मित्र, यह गिरिराज श्री हरि के सेवकों में सबसे ऊपर है और परम आनंद में लीन है, जिसे सदैव श्री बलराम और श्री कृष्ण के चरण कमलों द्वारा स्पर्श किया जाता है।
  5. गोपियों ने कृष्ण के वियोग में उनकी विभिन्न लीलाओं का अभिनय किया : श्री कृष्ण के सभी गोपियों के मध्य से अंतर्ध्यान होने पर गोपियों ने कृष्ण की खोज में व्याकुल होकर, उनके विभिन्न लीलाओं का अनुकरण करने लगीं। एक गोपी ने पूतना की नकल की, जबकि दूसरी ने बाल कृष्ण का अभिनय किया। एक गोपी ने उस लीला का अनुकरण किया जिसमे श्री कृष्ण दूर भटक गई गायों को बुला रहे हैं, कैसे वे अपनी बांसुरी बजाते हैं और कैसे वे विभिन्न लीला करते हैं। एक अन्य गोपी, जिसका मन कृष्ण में लीन था, एक मित्र के कंधे पर हाथ रखकर चल पड़ी और बोली, "मैं कृष्ण हूँ! हवा और बारिश से मत डरो, मैं आपको बचा लूंगा।" प्रेम मंदिर की दीवार पर इस सुन्दर लीला का चित्रण किया गया है।
    गोपियों ने कृष्ण के वियोग में उनकी विभिन्न लीलाओं का अभिनय किया : श्री कृष्ण के सभी गोपियों के मध्य से अंतर्ध्यान होने पर गोपियों ने कृष्ण की खोज में व्याकुल होकर, उनके विभिन्न लीलाओं का अनुकरण करने लगीं। एक गोपी ने पूतना की नकल की, जबकि दूसरी ने बाल कृष्ण का अभिनय किया। एक गोपी ने उस लीला का अनुकरण किया जिसमे श्री कृष्ण दूर भटक गई गायों को बुला रहे हैं, कैसे वे अपनी बांसुरी बजाते हैं और कैसे वे विभिन्न लीला करते हैं। एक अन्य गोपी, जिसका मन कृष्ण में लीन था, एक मित्र के कंधे पर हाथ रखकर चल पड़ी और बोली, "मैं कृष्ण हूँ! हवा और बारिश से मत डरो, मैं आपको बचा लूंगा।" प्रेम मंदिर की दीवार पर इस सुन्दर लीला का चित्रण किया गया है।
  6. भगवान शिव द्वारा नृत्य की लीला को चित्रित किया गया है, जो श्री कृष्ण प्रेम के शुद्धतम रूप में लीन हैं। प्रेम मंदिर की दीवार पर सुंदर लीला का चित्रण किया गया है।
    भगवान शिव द्वारा नृत्य की लीला को चित्रित किया गया है, जो श्री कृष्ण प्रेम के शुद्धतम रूप में लीन हैं। प्रेम मंदिर की दीवार पर सुंदर लीला का चित्रण किया गया है।
  7. युगल सरकार की झूलन लीला।
    युगल सरकार की झूलन लीला।
  8. कालिया नाग के मस्तक पर नृत्य करते हुए श्रीकृष्ण : कालिया वृंदावन में यमुना नदी में रहने वाला विषैला नाग था। एक बार कृष्ण और सखा गेंद खेल रहे थे, और खेलते समय कृष्ण कदम्ब के पेड़ पर चढ़ गए और नदी के किनारे पर लटक गए, गेंद नदी में गिर गई और कृष्ण उसके पीछे कूद पड़े। कालिया जहर की उल्टी करते हुए अपने एक सौ दस फणों के साथ कृष्ण के शरीर को चारों ओर से लपेट लिया। कृष्ण इतने बड़े हो गए कि कालिया को उन्हें छोड़ना पड़ा। तो कृष्ण ने अपने आप को हर हमले से बचा लिया, और जब उन्होंने देखा कि बृजवासी डरे हुए हैं तो वे अचानक कालिया के सिर पर चढ़ गए और अपना भार बढ़ने लगे, और कालिया के सिर पर नृत्य करने लगे। यह लीला बहुत ही मधुर और अनोखी है क्योंकि कालिया नाग के सिर पर श्रीकृष्ण ने जिस प्रकार से नृत्य किया था, ऐसा नृत्य किसी ने कभी नहीं देखा था, जबकि कालिया नाग अपनी जान बचाने के लिए प्रार्थना करने लगा। प्रेम मंदिर की बाहरी दीवार पर वही सुंदर लीला चित्रित है।
    कालिया नाग के मस्तक पर नृत्य करते हुए श्रीकृष्ण : कालिया वृंदावन में यमुना नदी में रहने वाला विषैला नाग था। एक बार कृष्ण और सखा गेंद खेल रहे थे, और खेलते समय कृष्ण कदम्ब के पेड़ पर चढ़ गए और नदी के किनारे पर लटक गए, गेंद नदी में गिर गई और कृष्ण उसके पीछे कूद पड़े। कालिया जहर की उल्टी करते हुए अपने एक सौ दस फणों के साथ कृष्ण के शरीर को चारों ओर से लपेट लिया। कृष्ण इतने बड़े हो गए कि कालिया को उन्हें छोड़ना पड़ा। तो कृष्ण ने अपने आप को हर हमले से बचा लिया, और जब उन्होंने देखा कि बृजवासी डरे हुए हैं तो वे अचानक कालिया के सिर पर चढ़ गए और अपना भार बढ़ने लगे, और कालिया के सिर पर नृत्य करने लगे। यह लीला बहुत ही मधुर और अनोखी है क्योंकि कालिया नाग के सिर पर श्रीकृष्ण ने जिस प्रकार से नृत्य किया था, ऐसा नृत्य किसी ने कभी नहीं देखा था, जबकि कालिया नाग अपनी जान बचाने के लिए प्रार्थना करने लगा। प्रेम मंदिर की बाहरी दीवार पर वही सुंदर लीला चित्रित है।
  9. श्री कृष्ण मिलन - लीला को इस तरह चित्रित किया गया है की जब श्री कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए, और गोपियां श्री कृष्ण की खोज करने लगीं और जब कृष्ण वियोग से उनकी पीड़ा चरम बिंदु पर पहुंचने वाली थी, तो कृष्ण उनके सामने उनके शुद्ध प्रेम से प्रकट हुए। इस लीला को यहाँ सुंदरता से चित्रित किया गया है।
    श्री कृष्ण मिलन - लीला को इस तरह चित्रित किया गया है की जब श्री कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए, और गोपियां श्री कृष्ण की खोज करने लगीं और जब कृष्ण वियोग से उनकी पीड़ा चरम बिंदु पर पहुंचने वाली थी, तो कृष्ण उनके सामने उनके शुद्ध प्रेम से प्रकट हुए। इस लीला को यहाँ सुंदरता से चित्रित किया गया है।
  10. प्रेम मंदिर, वृंदावन में चित्रित युगल सरकार वृंदावन के पुलिन पर खड़े हैं।
    प्रेम मंदिर, वृंदावन में चित्रित युगल सरकार वृंदावन के पुलिन पर खड़े हैं।
  11. श्याम सुंदर वृंदावन के बंशीवट में अपने अधरामृत पर दिव्य बांसुरी के माध्यम से विभिन्न गोपियों के नाम पुकारते  हुए, दिव्य लीला करते हैं,  जिसे यहाँ चित्रित किया गया है। ब्रज की गोपियों ने बांसुरी की आवाज सुनी, वे अपने कुल की नैतिकता की परवाह किए बिना, परमानंद में तुरंत अपने घरों से बाहर निकल श्री कृष्ण से मिलने पहुँच गयीं।
    श्याम सुंदर वृंदावन के बंशीवट में अपने अधरामृत पर दिव्य बांसुरी के माध्यम से विभिन्न गोपियों के नाम पुकारते हुए, दिव्य लीला करते हैं, जिसे यहाँ चित्रित किया गया है। ब्रज की गोपियों ने बांसुरी की आवाज सुनी, वे अपने कुल की नैतिकता की परवाह किए बिना, परमानंद में तुरंत अपने घरों से बाहर निकल श्री कृष्ण से मिलने पहुँच गयीं।
  12. वृंदावन के लता कुञ्जों में अपनी बांसुरी बजाते हुए श्याम सुंदर: प्रेम मंदिर की दीवार पर दिव्य लीला को दर्शाया गया है जब श्याम सुंदर अपनी बांसुरी बजा रहे हैं और अपने मधुर धुन से सबके ह्रदयों को आनंदित कर रहे हैं। श्री राधा रानी की छवि का ध्यान करते हुए, वे अपनी बांसुरी के माध्यम से राधा का नाम गाते हैं और बांसुरी के मधुर रस के पान से वृक्ष फलते-फूलते हैं।
    वृंदावन के लता कुञ्जों में अपनी बांसुरी बजाते हुए श्याम सुंदर: प्रेम मंदिर की दीवार पर दिव्य लीला को दर्शाया गया है जब श्याम सुंदर अपनी बांसुरी बजा रहे हैं और अपने मधुर धुन से सबके ह्रदयों को आनंदित कर रहे हैं। श्री राधा रानी की छवि का ध्यान करते हुए, वे अपनी बांसुरी के माध्यम से राधा का नाम गाते हैं और बांसुरी के मधुर रस के पान से वृक्ष फलते-फूलते हैं।
  13. ब्रज गोपियाँ श्री कृष्ण और श्री बलराम के दर्शन करती हैं : यहाँ श्री कृष्ण और श्री बलराम की गाय चराने की लीला को दर्शाया गया है और गोपियाँ उन दोनों के दर्शन करके अपने को धन्य अनुभव करती हैं। श्रीमद्भागवत (१०.४४.१३) इसका बृहद वर्णन करता है। एक सखी दूसरे से कह रही है: "हे सखी, वास्तविक सत्य यह है कि ब्रज की भूमि परम शुद्ध और धन्य है क्योंकि यहां परम पुरुष मनुष्य के वेश में डोल रहे हैं, वही भगवान, जिनके चरण कमलों की पूजा महादेव शंकर और श्री रमा देवी करती हैं। अपने भाई बलराम और ग्वाल बालकों संग वे यहाँ विचरण करते हैं। विविध रंगों की पुष्प माला से सुशोभित, वे गायों को चराते हैं और मधुर बांसुरी बजाते हैं। कई प्रकार की लीलाओं में लीन, वे प्रसन्नतापूर्वक इधर-उधर डोलते हैं। उनके चरणकमलों के स्पर्श से यह ब्रजभूमि पवित्र और यशस्वी हो गई है।"
    ब्रज गोपियाँ श्री कृष्ण और श्री बलराम के दर्शन करती हैं : यहाँ श्री कृष्ण और श्री बलराम की गाय चराने की लीला को दर्शाया गया है और गोपियाँ उन दोनों के दर्शन करके अपने को धन्य अनुभव करती हैं। श्रीमद्भागवत (१०.४४.१३) इसका बृहद वर्णन करता है। एक सखी दूसरे से कह रही है: "हे सखी, वास्तविक सत्य यह है कि ब्रज की भूमि परम शुद्ध और धन्य है क्योंकि यहां परम पुरुष मनुष्य के वेश में डोल रहे हैं, वही भगवान, जिनके चरण कमलों की पूजा महादेव शंकर और श्री रमा देवी करती हैं। अपने भाई बलराम और ग्वाल बालकों संग वे यहाँ विचरण करते हैं। विविध रंगों की पुष्प माला से सुशोभित, वे गायों को चराते हैं और मधुर बांसुरी बजाते हैं। कई प्रकार की लीलाओं में लीन, वे प्रसन्नतापूर्वक इधर-उधर डोलते हैं। उनके चरणकमलों के स्पर्श से यह ब्रजभूमि पवित्र और यशस्वी हो गई है।"
  14. झूलन लीला - ब्रज में हर साल बरसात के मौसम के बीच, जब खेत और वन हरे-भरे रंग में बदल जाते हैं और चारों ओर फूल खिलते हैं, हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस दौरान युगल सरकार के लिए झूले लगाए जाते हैं। यहाँ लीला में, श्री कृष्ण राधा रानी को झूला झूला रहे हैं।
    झूलन लीला - ब्रज में हर साल बरसात के मौसम के बीच, जब खेत और वन हरे-भरे रंग में बदल जाते हैं और चारों ओर फूल खिलते हैं, हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस दौरान युगल सरकार के लिए झूले लगाए जाते हैं। यहाँ लीला में, श्री कृष्ण राधा रानी को झूला झूला रहे हैं।
  15. रास लीला में श्री कृष्ण के अंतर्ध्यान होने के बाद गोपियाँ कृष्ण की खोज करती हैं: श्रीमद्भागवतम के दसवें स्कंध के अध्याय ३० में लीला का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे गोपियाँ, कृष्ण से अलग होकर रात से पीड़ित हो उनको खोजती हैं। जड़ चेतन सभी से उन्होंने कृष्ण का पता पूछ रही हैं। उन्होंने लता, वृक्ष और हिरण जैसे जानवरों से भी पूछा जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। उन्होंने एक स्थान पर राधा कृष्ण के चरण चिन्ह देखे और अंत में उन्होंने केवल श्री कृष्ण के चरण चिन्ह ही देखे जो कि कीचड़ में गहराई से दबे हुए थे। इसलिए उन्होंने अंततः पुष्टि की कि श्री कृष्ण ने राधा रानी को अपने कंधों पर बिठाया होगा। अंत में, उन्होंने कहा कि "राधा रानी" निश्चित रूप से सभी गोपियों में सबसे श्रेष्ठ आराधिका हैं और सभी भक्तों में श्री कृष्ण की सबसे श्रेष्ठ भक्त हैं, क्योंकि वे उनसे इतने प्रसन्न थे कि उन्होंने हमको छोड़ दिया और श्री राधा को एकांत स्थान पर ले आए।
    रास लीला में श्री कृष्ण के अंतर्ध्यान होने के बाद गोपियाँ कृष्ण की खोज करती हैं: श्रीमद्भागवतम के दसवें स्कंध के अध्याय ३० में लीला का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे गोपियाँ, कृष्ण से अलग होकर रात से पीड़ित हो उनको खोजती हैं। जड़ चेतन सभी से उन्होंने कृष्ण का पता पूछ रही हैं। उन्होंने लता, वृक्ष और हिरण जैसे जानवरों से भी पूछा जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। उन्होंने एक स्थान पर राधा कृष्ण के चरण चिन्ह देखे और अंत में उन्होंने केवल श्री कृष्ण के चरण चिन्ह ही देखे जो कि कीचड़ में गहराई से दबे हुए थे। इसलिए उन्होंने अंततः पुष्टि की कि श्री कृष्ण ने राधा रानी को अपने कंधों पर बिठाया होगा। अंत में, उन्होंने कहा कि "राधा रानी" निश्चित रूप से सभी गोपियों में सबसे श्रेष्ठ आराधिका हैं और सभी भक्तों में श्री कृष्ण की सबसे श्रेष्ठ भक्त हैं, क्योंकि वे उनसे इतने प्रसन्न थे कि उन्होंने हमको छोड़ दिया और श्री राधा को एकांत स्थान पर ले आए।
  16. श्री कृष्ण ग्वाल बाल के साथ नृत्य करते हैं। यह लीला चित्रित किया गया है।
    श्री कृष्ण ग्वाल बाल के साथ नृत्य करते हैं। यह लीला चित्रित किया गया है।
  17. श्रीकृष्ण ने गोवर्धन धारण किया है: एक बार, जब नंद महाराज सहित ब्रज के बड़े लोग भगवान इंद्र की पूजा की योजना बना रहे थे, तब श्री कृष्ण ने उनसे प्रश्न किया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। नंद महाराज ने कृष्ण को समझाया कि यह हर साल भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए किया जाता था ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर ब्रज के लोगों को वर्षा प्रदान करते रहें। अंत में कृष्ण द्वारा आश्वस्त, ग्रामीणों ने पूजा नहीं किया। छोटे बच्चे कृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए ब्रज के निवासियों पर क्रोधित, स्वर्ग के राजा इंद्र ने वहां भयानक मेघों को भेजकर दंडित करने का निर्णय किया और बारिश के मेघ वृंदावन की भूमि को डुबोने लगे। श्री कृष्ण ने वृंदावन के ग्रामीणों को मूसलाधार बारिश से आश्रय प्रदान करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ट ऊँगली पर उठाकर ब्रज के लोगों की रक्षा की। यह घटना यह दर्शाती है कि भगवान कैसे उन सभी भक्तों की रक्षा करते हैं जो उनकी एकमात्र शरण लेते हैं।
    श्रीकृष्ण ने गोवर्धन धारण किया है: एक बार, जब नंद महाराज सहित ब्रज के बड़े लोग भगवान इंद्र की पूजा की योजना बना रहे थे, तब श्री कृष्ण ने उनसे प्रश्न किया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। नंद महाराज ने कृष्ण को समझाया कि यह हर साल भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए किया जाता था ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर ब्रज के लोगों को वर्षा प्रदान करते रहें। अंत में कृष्ण द्वारा आश्वस्त, ग्रामीणों ने पूजा नहीं किया। छोटे बच्चे कृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए ब्रज के निवासियों पर क्रोधित, स्वर्ग के राजा इंद्र ने वहां भयानक मेघों को भेजकर दंडित करने का निर्णय किया और बारिश के मेघ वृंदावन की भूमि को डुबोने लगे। श्री कृष्ण ने वृंदावन के ग्रामीणों को मूसलाधार बारिश से आश्रय प्रदान करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ट ऊँगली पर उठाकर ब्रज के लोगों की रक्षा की। यह घटना यह दर्शाती है कि भगवान कैसे उन सभी भक्तों की रक्षा करते हैं जो उनकी एकमात्र शरण लेते हैं।
  18. शाम को घर लौटते श्रीकृष्ण और बलराम: श्रीकृष्ण और बलराम की लीला को चित्रित किया गया है, जो शाम को सभी ग्वाल बाल संग गाय चराने के बाद घर वापस आ रहे हैं। भगवान शिव श्री कृष्ण के प्रेम में लीन होकर वृंदावन में एक वृक्ष के नीचे छिपकर उस भव्य दृश्य को देख रहे हैं। जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ने अपने प्रसिद्ध पद में इस लीला का वर्णन इस प्रकार किया है: "धूसरी धूरी भरे हरि आवत।" यह सूर्यास्त का समय है, इसलिए श्याम सुंदर हजारों गायों के साथ अपने घर वापस आ रहे हैं और उनका नीला शरीर गायों के खुरों द्वारा उठी धूल से धूल धूसरित है।"सो "कृपालु" झाँकी झाँकत हित, शंभू समाधि भूलावत।" श्री कृपालु जी कहते हैं, "इस दृश्य की सुंदरता इतनी सुन्दर है कि भगवान शंकर ने भी अपनी समाधि के आनंद को त्याग दिया।
    शाम को घर लौटते श्रीकृष्ण और बलराम: श्रीकृष्ण और बलराम की लीला को चित्रित किया गया है, जो शाम को सभी ग्वाल बाल संग गाय चराने के बाद घर वापस आ रहे हैं। भगवान शिव श्री कृष्ण के प्रेम में लीन होकर वृंदावन में एक वृक्ष के नीचे छिपकर उस भव्य दृश्य को देख रहे हैं। जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ने अपने प्रसिद्ध पद में इस लीला का वर्णन इस प्रकार किया है: "धूसरी धूरी भरे हरि आवत।" यह सूर्यास्त का समय है, इसलिए श्याम सुंदर हजारों गायों के साथ अपने घर वापस आ रहे हैं और उनका नीला शरीर गायों के खुरों द्वारा उठी धूल से धूल धूसरित है।"सो "कृपालु" झाँकी झाँकत हित, शंभू समाधि भूलावत।" श्री कृपालु जी कहते हैं, "इस दृश्य की सुंदरता इतनी सुन्दर है कि भगवान शंकर ने भी अपनी समाधि के आनंद को त्याग दिया।
  19. युगल सरकार के दिव्य लीला को चित्रित किया गया है जो एक साथ बैठकर यमुना तट पर विश्राम कर रहे हैं।
    युगल सरकार के दिव्य लीला को चित्रित किया गया है जो एक साथ बैठकर यमुना तट पर विश्राम कर रहे हैं।
  20. महारास लीला - गोपियों के प्रिय श्री कृष्ण ने शरद पूर्णिमा के शुभ दिन पर महारास लीला की। गोपियों के जितने रूप थे, श्री कृष्ण ने भी उतने ही रूप धारण किए। यह लीला वृंदावन के वंशीवट में हुई, जिसे बाहरी दीवार पर चित्रित किया गया है।
    महारास लीला - गोपियों के प्रिय श्री कृष्ण ने शरद पूर्णिमा के शुभ दिन पर महारास लीला की। गोपियों के जितने रूप थे, श्री कृष्ण ने भी उतने ही रूप धारण किए। यह लीला वृंदावन के वंशीवट में हुई, जिसे बाहरी दीवार पर चित्रित किया गया है।
  21. दिव्य रास लीला दर्शन: वृंदावन में दीवार पर चित्रित सुंदर रास लीला।
    दिव्य रास लीला दर्शन: वृंदावन में दीवार पर चित्रित सुंदर रास लीला।
  22. श्रीकृष्ण की बांसुरी की मधुर ध्वनि सुनती गोपियाँ।
    श्रीकृष्ण की बांसुरी की मधुर ध्वनि सुनती गोपियाँ।
  23. भगवान कृष्ण अपना मुकुट श्री राधा के चरण कमलों पर रखते हैं।
    भगवान कृष्ण अपना मुकुट श्री राधा के चरण कमलों पर रखते हैं।
  24. राधा रानी की चरण सेवा करते श्री कृष्ण। महारास लीला के मध्य दिव्य लीला हुई जब श्री राधा रानी थक गईं, श्री कृष्ण ने राधा रानी की चरण सेवा की। बाहरी दीवार में वही लीला चित्रित है।
    राधा रानी की चरण सेवा करते श्री कृष्ण। महारास लीला के मध्य दिव्य लीला हुई जब श्री राधा रानी थक गईं, श्री कृष्ण ने राधा रानी की चरण सेवा की। बाहरी दीवार में वही लीला चित्रित है।