दशा मुझ दीन की भगवन - श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
हे भगवन्! यदि आप मुझ दीन-हीन की दशा सम्भाल लेंगे और मुझे अपने चरणों की सेवा में लगा लेंगे, तो इसमें आपका क्या बिगड़ेगा?
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हे भगवन्! यदि आप मुझ दीन-हीन की दशा सम्भाल लेंगे और मुझे अपने चरणों की सेवा में लगा लेंगे, तो इसमें आपका क्या बिगड़ेगा?
हे प्रभु! मेरे लिए तो आप ही एकमात्र शरण व सर्वस्व हैं, किंतु आपके लिए तो मेरे जैसे अनगिनत जीव व अनुरागी हैं। अतः हे प्राणप्रियतम! आप जैसा भी उचित समझें वैसा व्यवहार करें, बस ऐसी कृपा करें कि हमारे इस निष्काम प्रेम की प्रतिज्ञा का सदा निर्वाह होता रहे।
हृदय की इस गम्भीर प्रेम-व्यथा को किसे कहें, क्योंकि यदि किसी से कहें भी तो कोई इसका विश्वास नहीं करता। सब केवल ऊपर-ऊपर से सांत्वना देना चाहते हैं, परन्तु भीतर लगे इस प्रेम-रोग को कोई पहचान नहीं पाता।
श्री भगवन्नाम के बिना योग, यज्ञ, तपस्या आदि समस्त साधन निष्फल हो जाते हैं। श्री गुरु छौना जी कहते हैं कि जैसे सेमर के वृक्ष का यत्नपूर्वक पालन करने पर, फल पकने पर भी भीतर से केवल व्यर्थ रुई (कपास) ही निकलती है, कोई खाने योग्य फल नहीं मिलता, वैसे ही नाम-हीन साधन भी निष्फल सिद्ध होते हैं।
ब्रज के आँगन में अलौकिक हिंडोला रचा गया है। श्री वृन्दावन की सघन कुंजों में इस अद्भूत उत्सव को देखकर स्वयं भगवान शंकर भी आनंदातिरेक में तांडव नृत्य करने लगे हैं।
हे किशोरी जी (श्रीराधा)! आपका यह अनुपम सौन्दर्य किसी भी मर्यादा का पालन नहीं करता। आपकी स्मृति मुझे अपनी सुध-बुध भुला देती है और मेरे हृदय के मर्मस्थल को प्रेम-बाणों से निरन्तर बींधती रहती है।
श्री कृष्ण के मन को हरने वाली, श्री राधा रानी की जय हो जिनके चरण-कमल मेरे शीश पर सदा सुशोभित हैं। उन्होंने अपनी कृपा-सुधा का सिंचन करके अपनी इस दासी के सूखे हुए जीवन रूपी धान को पुनः हरा-भरा कर दिया है।
श्री राधा के वियोग में श्री कृष्ण 'राधा' नाम की निरंतर पुकार कर रहे हैं, एक क्षण को भी मुख से नहीं भुला रहे। समस्त विश्राम को त्याग कर अब तो केवल यही लालसा है कि कब प्रिया जी की उस बाँकी चितवन की रसमय झाँकी प्राप्त होगी।
The sakhīs repeatedly offer their very lives for Śrī Yugala, waving water over Them and drinking it—a loving and auspicious ritual in which water is waved over the beloved ones so that no obstacle or inauspiciousness may ever touch Them.
यदि धन-संपदा की तृष्णा के वशीभूत होकर मैं श्रीधाम वृन्दावन को पीठ दिखाकर किसी अन्य स्थल की ओर पलायन करूँ, तो मैं अपने ही नेत्र फोड़ लेने योग्य हूँ।।
अति चतुर और सुंदर सखी श्री ललिता जी अपने हाथों में वीणा लेकर खड़ी होकर मधुर सुरों में गा रही हैं। शय्या पर लेटे हुए श्री श्यामा-श्याम इस मधुर तान को सुन रहे हैं, जिससे उनके कानों में इस संगीत को सुनने की रुचि और अधिक बढ़ रही है।
श्री नागरीदास जी कहते हैं कि उन्हें श्री विट्ठलविपुल देव जी तथा श्री बिहारिन देव जी का पूर्ण सत्संग प्राप्त हुआ है। ऐसे अनन्य रसिकों के प्रभाव से श्री प्रिया-प्रियतम के प्रति जो अनन्य अनुराग प्रकट हुआ है, उससे उनका चित्त नित्य प्रफुल्लित और आनंदित रहता है।
श्री वृन्दावन धाम में निवास करने वाले हलवाइ अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली है। वे परम प्रेम से अत्यंत सुंदर जलेबी, खुरमा, खाजा और मलाई इत्यादि मिष्ठान तैयार करते हैं।
अन्य स्थान पर किया गया पाप तीर्थ में नष्ट हो जाता है, परंतु तीर्थ पर किया गया पाप वज्र लेप की तरह दृढ़ हो जाता है।
मैं श्री राधिका और प्रियतम लाल पर आरती वारता हूँ। उनके प्रत्येक अंग पर स्वाभाविक रूप से सुशोभित आभूषणों की अत्यंत सुंदर झलक और उनकी इस अनुपम रूप-माधुरी को मैं अपने नेत्रों से निहार रहा हूँ।
जीव मिथ्या सांसारिक संबंधों एवं वस्तुओं के संग्रह में निरंतर लगा रहता है, परंतु अपने एकमात्र सच्चे हितैषी श्री श्यामसुंदर के अकारण-निश्चल प्रेम का परित्याग किए रहता है। वह परमार्थ से विमुख होकर उसकी ओर पीठ कर लेता है तथा अपनी दृष्टि और समस्त पुरुषार्थ केवल नश्वर संसार में स्वार्थयुक्त लगाए रखता है।
जो रसिक संत श्री श्यामा-श्याम की रूप-रस माधुरी में मग्न हैं, महाप्रेम के पुंज में रंगे हुए हैं और समस्त संसारी नातों का त्याग करके मन को जीतकर अवधूत बन गए हैं।
जिस श्रीवृन्दावन में श्रीकृष्णचन्द्र आनन्दपूर्वक नित्य विहार करते हैं और जहाँ निरालस काम-विलास-लीलाओं का अखण्ड समूह विद्यमान है, वहाँ मेरा मन श्रीराधा महारानी के चरण-कमलों पर गुंजार करने वाली भ्रमरी के समान सदा अनुरक्त रहे।
श्री हित हरिवंश महाप्रभु के चरणों के अतिरिक्त मैं और किसका बल (आश्रय) ग्रहण करूँ? जिनके लिए लाड़ली-लाल (श्री राधा-कृष्ण) का दिव्य केलि-मिलाप और सुखदायक श्री वृन्दावन ही एकमात्र वास्तविक धन है।
हे भगवन्! आप दीनबंधु हैं और मैं दीन हूँ। आपका और मेरा यह बहुत सुंदर बना-बनाया नाता है, अतः मेरे इस संबंध पर आप अवश्य ही विचार कीजिए। हे कृपालु महाप्रभु! मेरी इस विशेष विनती को सुनकर मुझ पर अपनी कृपा कीजिए।