वॉलपेपर

श्री राधा कृष्ण और वृंदावन धाम को समर्पित वॉलपेपर।

141 वॉल्पेपर उपलब्ध हैं

  1. अली किशोरी मनहि लगाये गरे लगावत प्यारी

    श्री अलि किशोरी जी कहते हैं कि हमारी सामर्थ्य तो केवल इतनी ही है कि हम किसी प्रकार अपने इस चंचल मन को स्वामिनी श्री राधा प्यारी में लगाने का प्रयास करते हैं; परन्तु हमारी लाड़ली जू इतनी परम करुणामयी और वात्सल्यमयी हैं कि वे हमारे इस लघु प्रयास पर ही रीझकर, अत्यंत प्रेमपूर्वक हमें अपने श्रीकंठ (गले) से लगा लेती हैं।

  2. प्‍यारे वृन्‍दावन के रूख

    श्री वृंदावन धाम के वृक्ष श्री हरि को अत्यंत प्यारे हैं । इन वृक्षों की शाखा तोड़ने से श्री हरि को कोटि गौ हत्या से भी अधिक कष्ट होता है ।

  3. परम दयाल दूजी आपसी न दीसै और

    हे श्री राधा, आप परम दयालु हैं एवं आपके जैसा मुझे कोई और दिखाई नहीं देता । हे सिरमौर, मैं आपके चरण कमलों में बारंबार प्रणाम करता हूँ ।

  4. सब भय छौड़ि अब लाड़िली की आड़ लीहै - श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी

    हमने सब प्रकार के भय एवं आश्रय को त्याग कर अनन्य रूप से श्री लाड़ली [श्री राधा] की ही आड़ (आश्रय) ली है और हमें श्री विपिन बिहारी लाल पर पूर्ण भरोसा है ।

  5. ताके वल गर्वभरे रसिकव्यास से न डरे - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (72)

    श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उन्हीं श्री राधा के बल के गर्व में मैंने लोक, वेद, कर्म, धर्म एवं चारों प्रकार की मुक्ति का निर्भयता पूर्वक त्याग कर दिया है । [4]

  6. जाग्रत सुपने सैन में हिय राधा कौ ध्यान

    ब्रजजीवन जी कहते हैं कि जाग्रत, स्वप्न एवं सुषुप्ति में मेरे ह्रदय में श्री राधा का ही ध्यान रहता है । अंदर बाहर, दिन-रात मेरे मन एवं इन्द्रियों में श्री राधा का वही सुन्दर रूप छाया रहता है ।

  7. जोग जज्ञ जप तप कछूवै न साधे ऐसे

    श्री हठी जी महाराज कहते हैं कि मैंने कोई भी साधन नहीं किया, न योग किया न यज्ञ, न जप किया न तप, मैंने तो एकमात्र श्री राधारानी के चरण कमलों की ही आराधना की है।

  8. मेरी भववाधा हरौ राधा नागरि सोय

    हे श्री राधा, मेरी भव बाधा को केवल आप ही हर सकती हो, कृपया इसे हरो। मैं आपकी महिमा में इतना ही कहूं कि जब आपके तन की छाया भी श्री कृष्ण पर पड़ती है तो वह हरित (प्रसन्न) हो उठते हैं।

  9. मेरी गति होउ सोई महरानी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3)

    मेरी गति श्री राधिका महरानी हैं जिनकी भौंहौं की हिलनि को कृपा प्राप्त करने हेतु नित्य ही श्याम सुंदर भी निहारते रहते हैं।

  10. सर्वोपरि म्हारी महरानी - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (38)

    हमारी महारानी श्री राधिका रानी सर्वोपरि हैं, भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी,भगवान शिव एवं सनकादिक भी श्री राधा रानी की महिमा को संपूर्ण रूप से नहीं जान पाए हैं ।