रसिक संतों की जीवनी
वास्तविक रसिक संत अत्यंत दुर्लभ हैं। पिछले 500 वर्षों में ललिता अवतार श्री हरिदास, मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु, विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास व्यास एवं अन्य रसिक महापुरुषों ने ब्रज वृंदावन धाम का अद्भुत रस प्रकट किया।
72 जीवनियाँ उपलब्ध हैं
श्री अभयराम जी की जीवनी
श्री अभयराम जी जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्री 'श्रीजी' श्री निम्बार्कशरण देवाचार्य जी के शिष्य थे। श्री अभयराम जी की जन्म तिथि का ठीक-ठीक पता नहीं चलता पर अन्तः साक्ष्य एवं वंश परम्परा के आधार पर ज्ञात होता है कि इनका जन्म 1830-1835 ईसवी के आसपास हुआ होगा।
श्री चतुरदासजी की जीवनी
श्री चतुरदासजी का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में किसी मथुरिया चतुर्वेदी परिवार में भाद्र शुक्ल 6, 1753 को हुआ था।
गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की जीवनी
गो. श्रीराधालाल जी का जन्म 1885 की आश्विन बदी तृतीया के दिन वृन्दावन में हुआ था। इनके पिता गो. श्रीगोवर्द्धनलाल जी श्रीराधावल्लभ मन्दिर के रासवंशीय सेवाधिकारी थे।
श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी
माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।
श्री कल्याण पुजारी जी की जीवनी
कल्याण पुजारी जी दृढ व्रत धारण करनेवाले भक्त हैं जो नवल किशोर श्री श्यामाश्याम के अनन्य रस-उपासक हैं । इनके मुख से मधुर वाणी निकलती थी जो सबके मन का हरण कर लेती थी एवं सुख देनेवाली थी ।
श्री सहचरिशरण देव जी की जीवनी
श्री सहचरीशरण देव जी का जन्म 1773 में कश्मीर के अवन्तिपुरी में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था । इनका नाम सखाराम था । इनके पिता का नाम सिखरराम था ।
श्री रामराय जी की जीवनी
श्री रामराय जी का प्राकट्य रावी नदी के तट पर बसे लाहौर नगरी में सारस्वत ब्राह्मण कुल में 1483 वैशाख शुक्ल 11 को मध्यान काल में हुआ ।
श्री ललित किशोरी जी की जीवनी (गौड़ीय संप्रदाय)
श्री ललित किशोरी जी का जन्म लखनऊ में मिती कार्तिक कृष्णा में द्वितीय दिन सन 1825 में हुआ था। इनके पितामह शाह बिहारीलालजी उस समय लखनऊ में प्रसिद्ध धनाढ्य थे नवाबों से उनको “शाह" उपाधि प्राप्त थी।
श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी की जीवनी
श्री वृन्दावन देवाचार्य जी श्रीनिम्बार्क संप्रदाय के एक महान् प्रतापी आचार्य हो गये हैं । आचार्यपीठ सलेमाबाद (अजमेर), जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर एवं किशनगढ़ आदि राज्यों की तवारिखों में 1735 से 1797 तक इनके नामों का उल्लेख मिलता है ।
श्री वल्लभरसिक जी की जीवनी
श्री वल्लभरसिक जी का जन्म अनुमानतः 1600 के लगभग हुआ है । इनके पिता श्री गदाधर भट्ट जी थे जो एक महान गौड़ीय भक्त हुए हैं । इनके बड़े भ्राता श्री रसिकोत्तंस थे, जिनकी रचना 'प्रेम-पत्तनम्' प्रसिद्ध है ।
श्री ब्रजजीवन जी की जीवनी
श्री ब्रजजीवन जी का जन्म 1738 के लगभग हुआ था । भक्त-चरित्रों को पढ़ने की स्वाभाविक प्रवृत्ति इन्हें अपने माता पिता से पैतृक सम्पत्ति के रूप में प्राप्त हुई होगी ।
श्री ब्रज निधि जी की जीवनी (महाराजा सवाई प्रतापसिंह)
महाराज प्रतापसिंहजी (ब्रजनिधिजी) सूर्यवंश की प्रख्यात शाखा कछवाहा-वंश के मानों सूर्य ही थे । महाराज श्री रामचंद्रजी से 196 वीं पीढ़ी में राजा सोढ़देवजी हुए, जो अपने वीर पुत्र दूलहरायजी सहित ढूँढाड़ देश में आकर यहाँ के यशस्वी राजा हुए ।
श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी का चरित्र
राधावल्लभ संप्रदाय के गोस्वामी श्री हित रूपलाल जी ने अपने सहचरी वपु से श्री श्यामा श्याम की एक लीला का दर्शन किया, जिसे वे स्वयं वर्णन कर रहे हैं
श्री लाल बलबीर (बद्रीप्रसादजी) की जीवनी
वृन्दावन में एक से एक उत्कृष्ट कवि, आचार्य, ज्ञानी, भक्त, रसिक तथा मनीषी हुए हैं ऐसे प्रकृत भक्त कवियों में 'लाल बलवीर' (बद्रीविशाल) का नाम भी उल्लेखनीय है ।
श्री बणीठणी जी की जीवनी
श्री बणीठणी जी की रचना बड़ी सरस है एवं युगल किशोर श्री श्यामाश्याम की लीलाओं से परिपुष्ट है। इन्होने अपने उपास्य श्री राधा कृष्ण के यश का विस्तार किया।
श्री ललितलड़ैती जी की जीवनी
श्री ललितलड़ैती जी उन महात्माओं की परम्परा में आते हैं, जिन्होंने रासमंच के लिये लीलाओं को लिख कर रासानुकरण की विधा को समृद्ध किया है। इनका 'दम्पतिविलास' लीला-साहित्य की दृष्टि से एक ऐसा कोश-ग्रन्थ है, जिसमें लीला-सामग्री अपने फुटकर एवं संग्रथित - दोनों रूपों में विद्यमान है।
श्री ब्रजवासीदास जी की जीवनी
रसिक भक्त कवि श्री ब्रजवासीदास जी परम विरक्त एवं सांसारिक प्रचार-प्रपंच से सर्वदा दूर रहने वाले सिद्ध भक्त थे। निरन्तर श्रीराधा माधव का चिन्तन एवं उनका ही गुणानुवाद वर्णन इनका प्रमुख कार्य था।
श्री रूपरसिक देवाचार्य जी की जीवनी
श्री रूपरसिक देवाचार्य जी का जन्म दक्षिण देश में हुआ था और ये जाति के ब्राह्मण थे। श्री परशुराम देवाचार्य जी के समकालिक होने के कारण श्री रूपरसिक देवाचार्य जी का जन्म 1500 के लगभग अनुमानित होता है।
श्री प्रियादास जी की जीवनी
भक्त प्रवर श्री प्रियादास जी का जन्म सूरत-नगर के राजपुरा नामक ग्राम में हुआ था। इनका जन्म 1683 से कुछ पूर्व का अनुमानित है।
श्री माधुरीदास जी की जीवनी
माधुरीदास जी माधुरी कुण्ड के निवासी थे। गान-कला में कुशल थे। गोपीजनवल्लभ श्रीकृष्ण के उपासक थे। उज्वल रस के में इनकी प्रीति थी, प्रेमा-भक्ति इनका मार्ग था। अष्टयाम भावना में सदैव तल्लीन रहते थे।