प्रियतम सोचें मन गोविन्द राधे, जहाँ भी प्यारी पग धरें बता दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज (6129)

प्रियतम सोचें मन गोविन्द राधे, जहाँ भी प्यारी पग धरें बता दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज (6129)

प्रियतम सोचें मन गोविन्द राधे, जहाँ भी प्यारी पग धरें बता दे।
वहां की भूमि मैं गोविन्द राधे, बनूँ तो भाग्य मनाऊँ बता दे ॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6129)

प्रियतम श्री कृष्ण मन में यह सोचते हैं कि ऐसा मेरा कब भाग्य होगा कि जहाँ जहाँ प्यारी राधा चलें वहां कि भूमि ही मैं बन जाऊं ।