आदि बद्रीनाथ धाम - ब्रज

आदि बद्रीनाथ धाम - ब्रज

पद्मपुराणोक्त माहात्म्यानुसार
श्री कृष्ण के धाम जाते ही कलि का कवल बनने लगी धरा। कलि के 260 वर्ष पश्चात् देवर्षि नारद जी ने जब भक्ति ज्ञान वैराग्य को जर्जर अवस्था में देखा तो उन्हें वेद ध्वनि, गीता पाठ सुनाया पर इससे भी ज्ञान-वैराग्य की अचेतावस्था को दूर न कर सके तो यहाँ बदरीवन में आये हैं।
नारद जी ने निश्चय किया की "में यहाँ तप करूंगा", अतः यहाँ तपोवन भी है। तप का निश्चय करते ही देखा

तावद्ददर्श पुरतः सनकादीन्मुनीश्वरान्। कोतिसूर्यसमाभासानुवाच मुनिसत्तमः॥
सामने गन्धमादन पर्वत पर सनकादिक मुनिसत्तमों का दर्शन प्राप्त हुआ और सनकादिक व देवर्षि नारद जी का परस्पर जो संवाद हुआ है वह यहीं हुआ है। यहीं सनकादिक के द्वारा पुराण तिलक श्रीमद्भागवत जी की महिमा प्रकट हुई है। पद्मपुराणोक्त भागवत माहात्म्य दूसरे अध्याय में यह संवाद दृष्टव्य है। 

गर्ग संहितानुसार
एक बार श्रीकृष्ण ने ऐसी वंशी बजाई कि उसका सारे ब्रह्माण्ड पर प्रभाव पड़ा। ब्रह्माण्ड को चीरकर वंशी वैकुण्ठ में चली गई।

रुन्धन्नंम्बुभृतश्चमत्कृतिपरं कुर्वन्मुहुस्त्वंबरं ध्यानाद्धंतनयन्सनन्दनमुखान्विस्मेरयन्वेधसम्।
औत्सुक्याद्बलिभिर्बलिं चटुलयन्मोगेन्द्रमाघूर्णयन्मिंदन्नंडकटाहभित्तिमभितो बभ्राम वन्शीध्वनिः॥
(गर्ग संहिता 42/3)

'मुरली धुनि वैकुण्ठ गई' यह आदिबद्री का मूल मन्त्र है। यहाँ के आराध्य राधा माधव है, जो बद्रीनाथ जी विराज रहे हैं मन्दिर में, वे आराध्य नहीं हैं, वे तो युगल सरकार की सेवा करने के लिए यहाँ आये हैं।

"मुरली घुनि वैकुण्ठ गई।
नारायण कमला सुनि मोहे अति रूचि हृदय भई॥"
भगवान् वैकुण्ठ नाथ लक्ष्मी जी से बोले हे देवि! ये वंशी सुनो, देखो, भगवान् कुञ्ज विहारी राधा माधव रास कर रहे हैं।

"श्री कुंजबिहारी विहरत देखि, जीवन जनम सफल करि लेखि।"
यह सुख यहाँ वैकुण्ठ में नहीं है, यह तो केवल वृन्दावन की रज में ही है। चलो हम भी वहाँ चलते हैं।

"एहि सुख तिहुँ पुर है कहाँ"
यह सुख न उर्ध्वलोकों में है, न माया के लोकों में है। सारी त्रिलोकी में कहीं भी नहीं है।

"श्री वृन्दावन हमते दूर"
ये रस केवल ब्रजरज में मिल सकता है। इसलिए ब्रजरज को लक्ष्मी जी भी तरसती है।

"तत्र देवसरोरम्यं बद्रीनाथेन निर्मितं"
स्वयं बद्रीनाथ भगवान् ने युगल सरकार के लिए देव सरोवर बनाया। खोह में "ठाकुर श्रीजी अन्तर्धान हुए थे और गोपियों को छोड़कर यहाँ रोहिताचल पर्वत पर आए। जिससे खो ग्राम नाम पड़ा। यह गोवर्धन से ३ योजन दूर है। यह रोहिताचल पर्वत, बद्रीनाथ भगवान् लक्ष्मी नारायण ने श्रीजी ठाकुर जी के लिए सजाया था। इसमें बड़ी सुन्दर सुन्दर कुञ्जें थीं। सुनहली लताएँ थी, 'काञ्चिनी' माने राधारानी के रंग की सुनहली लताये थीं, अतः उसे कनकाचल पर्वत कहते हैं। जो पीला प्रकाश कर रही थीं। उस देवसरोवर में अनेको सुन्दर सुन्दर मछलियाँ, कछुए एवं अन्य जलचर भी थे।

सहस्रदलपद्मैश्च मण्डितं तदितस्ततः।
भ्रमरध्वनिसंयुक्तं पुंस्कोकिलरुतव्रतम्॥
(गर्ग संहिता. 20/40)

सहस्र-सहस्र पंखुड़ियों वाले उसमें कमल थे। चारों ओर असंख्य भौरे गूंज रहे थे। बारह मास वहाँ कोयलें बोलती थीं, कमल की सुगन्ध से सरोवर भरा रहता था। उसके किनारे पर मीठी-मीठी हवा बह रही थी।

विकसत्पद्यगन्धाढयं तत्तीरं मन्दमारुतम्। रमया राधया सार्द्धं माधवो निषसाद ह॥
(गर्ग संहिता. 20/40)
उस सरोवर के किनारे दोनों राधा माधव बैठ गए। वैकुण्ठ से भी सुन्दर सरोवर था। आखिर तो बद्रीनाथ जी ने श्रीजी ठाकुर जी के लिए बनाया था।

स्थान:
आदि बद्री डीग, राजस्थान में बरसाना के श्री राधारानी मंदिर से 27 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित है।


  1. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में श्री नाथ जी और श्री राधा कृष्ण के निकटतम दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में श्री नाथ जी और श्री राधा कृष्ण के निकटतम दर्शन
  2. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर और श्री उद्धव जी के निकटतम दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर और श्री उद्धव जी के निकटतम दर्शन
  3. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर, श्री उद्धव जी और भगवान गणेश के निकटतम दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर, श्री उद्धव जी और भगवान गणेश के निकटतम दर्शन
  4. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नाथ, भगवान नर और भगवान गणेश के निकटतम दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नाथ, भगवान नर और भगवान गणेश के निकटतम दर्शन
  5. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान श्री नाथ जी और श्री राधा कृष्ण के सुंदर दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान श्री नाथ जी और श्री राधा कृष्ण के सुंदर दर्शन
  6. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर, श्री उद्धव जी और भगवान गणेश के सुंदर दर्शन
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री नारायण, भगवान नर, श्री उद्धव जी और भगवान गणेश के सुंदर दर्शन
  7. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान रामेश्वर और भगवान गणेश के सुन्दर दर्शन।
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान रामेश्वर और भगवान गणेश के सुन्दर दर्शन।
  8. ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान रामेश्वर और भगवान गणेश के दर्शन।
    ब्रज में आदि बद्रीनाथ धाम में भगवान रामेश्वर और भगवान गणेश के दर्शन।