इमली तला का अर्थ है इमली का वृक्ष। दिव्य महारास लीला के दौरान, जब श्री राधा रानी जी रास से अलक्षित हो गई (दूर चली गई), तो श्री कृष्ण इस इमली के वृक्ष के नीचे आकर बैठ गए और श्री राधा रानी का रूप ध्यान किया एवं राधा नाम का जप ( उच्चारण) करने लगे और श्री राधा रानी को यहाँ प्राप्त किया। इसलिए यह जगह इमली तला के रूप में प्रसिद्ध है। श्री राधा रानी का अभिषेक भी यहीं हुआ। श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने भगवान श्री कृष्ण के शरीर का रंग भी ग्रहण किया। श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने इस वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान श्री कृष्ण का श्री राधा रानी से अलग होने का उन्मादपूर्ण (अति आनंदित) भावना में जप किया। यहाँ भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी अक्रूर घाट से यमुना तट पर इमली तला के नीचे बैठने के लिए रोज़ाना आया करते थे। आज इस वृक्ष के नीचे भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी की एक मूर्ति स्थापित है।
मंदिर का समय:
सवेरे 5:15 बजे - मंगला आरती
सवेरे 8:00 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:00 बजे - राजभोग आरती
शाम 6:30 बजे - संध्या आरती
शाम 7:30 बजे - शयन आरती
स्थान:
यह यमुना जी के किनारे श्रृंगार वट, केशी घाट के पास स्थित है।