मान गढ़, गहवर वन, बरसाना

मान गढ़, गहवर वन, बरसाना


यहाँ इस स्थान पर जब श्री राधा ने मान किया था तब श्यामसुंदर ने उन्हें मनाया था। मनाने के बहुत से उपाय किए, कभी उनके चरणों में मस्तक रखते, कभी उनको पंखा करते, कभी दर्पण दिखाते, कभी विनती करते, परंतु जब श्री राधा रानी इसपर भी नहीं रीझतीं तब श्यामसुंदर सखियों का सहारा लेते है। इन्हीं लीलाओं के कारण यहां का नाम मानगढ़ पड़ गया। यहाँ मान का मतलब  रूठना | यह मान कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होता, जैसा कि संसार में होता है, परंतु यहाँ श्री राधा रानी मान करती हैं श्याम सुंदर को सुख प्रदान करने के लिए |
मान मंदिर में श्रीमान बिहारी लाल जी के दर्शन हैं।
 
गोविंद जी का एक पद है जिसमें उन्होंने लिखा है कि श्री राधा रानी का मान शिखर के नीचे से शुरू हुआ और जैसे-जैसे श्याम सुंदर ने मनाया वैसे वैसे श्रीजी ऊपर चढ़ती गईं ।

आवत जात हौं हार परी री ।
ज्यों ज्यों प्यारो विनती कर पठवत त्यों त्यों तू गढ़ मान चढ़ी री ।। [1]
तिहारे बीच परे सोई बाबरी हौं चौगान की गेंद भई रीं ।
' गोविन्द ' प्रभु को वेग मिल भामिनि सुभग यामिनी जात बही री ।। [2]
- श्री गोविंद स्वामी 

यह बरसाना के मानगढ़ का पद है एवं सुंदर लीला मानगढ़ की प्रस्तुत की गई है । श्री गोविंद स्वामी कहते हैं कि राधारानी का मान शिखर के नीचे से शुरू हुआ और जैसे-जैसे श्यामसुंदर ने मनाया वैसे-वैसे श्रीजी ऊपर चढ़ती आयीं । जब श्रीजी ऊपर चढ़ आयीं तो श्यामसुंदर ने सखियों का सहारा लिया । उन्होंने विशाखा जी व ललिता जी से कहा कि जाओ राधारानी को मनाओ, हमारी तो सामर्थ नहीं है । हम तो थक गये, श्री ललिता जी व अन्य सखियाँ जब यहाँ आती हैं और श्रीजी से कहती हैं कि आप अपना मान तोड़ दो तो श्रीजी मना कर देती हैं । सखी ठाकुर जी के पास नीचे जाती हैं तो ठाकुर जी फिर ऊपर भेज देते हैं  फिर नीचे जाती हैं तो फिर ऊपर भेज देते हैं तो आखिर में सखी बोली कि हे राधे ! इस गिरी पर मैं कई बार चढ़ी और कई बार उतरी । मैं तो थक गई । आपका मान तो टूटता ही नहीं । इधर से आप भगा देती हो और उधर से वो बार-बार प्रार्थना करते हैं कि जाओ-जाओ । सखी कहती है कि हे राधे ! मैं चौगान की गेंद की तरह से भटक रही हूँ । हे राधे ! जल्दी से श्यामसुंदर से मिलो । ये रात बीती जा रही है ।   

तब सभी सखियाँ नीचे जातीं हैं और फिर ऊपर की ओर बढ़ती हैं ताकि राधा रानी, कन्हैया को स्वीकार कर लें और फिर जैसे सखियाँ लौटने लगतीं हैं, फिर श्यामसुंदर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रार्थना करते हैं।  यह मान मंदिर ब्रह्मगिरि पर्वत पर बना है|  मान को संसार में रूठना समझा जाता है परंतु मान एक लीला है। श्री कृष्ण को सबसे अधिक सुख श्री राधा रानी ही देती हैं, जब श्रीजी देखती हैं कि श्यामसुंदर हमारे प्रेम की आधीनता चाहते हैं और हमारे चरण स्पर्श चाहते हैं, तो उन को केवल सुख देने के लिए वह मान करती हैं। यह एक बहुत ही अद्भुत लीला है । मान गढ़, गहवर वन, बरसाना में है।

  1. मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा कृष्ण
    मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा कृष्ण
  2. मानगढ़ की सीढ़ियाँ, मान मंदिर, बरसाना की ओर जाती हैं
    मानगढ़ की सीढ़ियाँ, मान मंदिर, बरसाना की ओर जाती हैं
  3. मान मंदिर से बरसाना का दृश्य
    मान मंदिर से बरसाना का दृश्य
  4. मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा की छवि
    मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा की छवि
  5. बरसाना में मानगढ़ का प्रवेश
    बरसाना में मानगढ़ का प्रवेश
  6. गहवरवन में मान मंदिर की सीढ़ियों पर श्री राधा नाम
    गहवरवन में मान मंदिर की सीढ़ियों पर श्री राधा नाम
  7. गहवरवन में मान मंदिर से श्री राधा सरोवर की ओर जाने वाला मार्ग
    गहवरवन में मान मंदिर से श्री राधा सरोवर की ओर जाने वाला मार्ग
  8. यह मान मंदिर की बहुत छोटी गुफा की झलक है। यह गुफा गहवर वन के अंत तक है। इस गुफा के दर्शन करने का यह दिव्य अनुभव है। जगद्गुरु श्री कृपालु जी, श्री रमेश बाबा, श्री राधानाथ स्वामी जैसे कई संतों ने यहां मान मंदिर, बरसाना में भजन किए।
    यह मान मंदिर की बहुत छोटी गुफा की झलक है। यह गुफा गहवर वन के अंत तक है। इस गुफा के दर्शन करने का यह दिव्य अनुभव है। जगद्गुरु श्री कृपालु जी, श्री रमेश बाबा, श्री राधानाथ स्वामी जैसे कई संतों ने यहां मान मंदिर, बरसाना में भजन किए।
  9. मान मंदिर, बरसाना में श्रीविग्रह दर्शन
    मान मंदिर, बरसाना में श्रीविग्रह दर्शन
  10. गहवर वन में मान मंदिर
    गहवर वन में मान मंदिर
  11. यहां मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा के चित्र की पूजा की जाती है
    यहां मान मंदिर, बरसाना में श्री राधा के चित्र की पूजा की जाती है
  12. मान मंदिर से गहवर वन की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ
    मान मंदिर से गहवर वन की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ