मदन टेर, वृंदावन

मदन टेर, वृंदावन


इस सुंदर स्थान पर स्थित सुन्दर बगीचे में एक बार श्री कृष्ण और श्री राधा रानी गोपियों के साथ लीलाओं का रस (आंनद) ले रहे थे। यह कहा जाता है कि कामदेव (कामदेव को मदन के रूप में जाना जाता है) वह श्री कृष्ण को अपने सौंदर्य से आकर्षित करने के उदेश्य ( इरादे )से यहाँ आये थे। लेकिन जब उन्होंने श्री कृष्ण को देखा, तो वह उनके अदभुत सौंदर्य से इतने आकर्षित (मोहित) हो गये कि वह पूरी तरह से विचलित हो गये और भूमि पर मूर्छित होकर गिर गये।

हित हरिवंश महाप्रभु (वृन्दावन के रसिक संत) वर्ष 1506 में श्री राधावल्लभ लालजी के साथ वृंदावन आये थे और उनकी स्थापना की । यह स्थान वृन्दावन में मदन टेर (वरहा घाट) बन गया। श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने श्री कृष्ण की लीलाओं के साथ समय व्यतीत किया और हित चौरासी नामक वाणी ग्रन्थ की रचना की । भक्त यहाँ 'वट' वृक्ष के दर्शन भी कर सकते है जिसके नीचे श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने लीला दर्शन कर हित चौरासी लिखी।

स्थान:
मदन टेर वरहा घाट से पहले दाहिने हाथ पर परिक्रमा मार्ग पर स्थित है और वृंदावन में कलिया घाट के लगभग 1 किमी पीछे है।
  1. श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहां अपना भजन किया और इस 'वट' वृक्ष के नीचे श्री हित चतुरासी की रचना की। अब भी यह  'वट' वृक्ष दर्शन के लिए उपलब्ध है।
    श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहां अपना भजन किया और इस 'वट' वृक्ष के नीचे श्री हित चतुरासी की रचना की। अब भी यह 'वट' वृक्ष दर्शन के लिए उपलब्ध है।
  2. मदन टेर के बाढ़ पर लिखे गए वृन्दावन सत लीला के छंद।
    मदन टेर के बाढ़ पर लिखे गए वृन्दावन सत लीला के छंद।
  3. मदन टेर में भजन करता एक श्रद्धालु
    मदन टेर में भजन करता एक श्रद्धालु
  4. मदन टेर, वृंदावन में वन का दृश्य
    मदन टेर, वृंदावन में वन का दृश्य
  5. मदन टेर, वृंदावन में सुन्दर वन मार्ग
    मदन टेर, वृंदावन में सुन्दर वन मार्ग
  6. मदन टेर, वृन्दावन में वन के प्रवेश द्वार का दृश्य
    मदन टेर, वृन्दावन में वन के प्रवेश द्वार का दृश्य
  7. मदन टेर, वृंदावन के वन के अंदर एक कुटी में सो रहा एक बंदर
    मदन टेर, वृंदावन के वन के अंदर एक कुटी में सो रहा एक बंदर
  8. मदन टेर, वृंदावन के वन के अंदर एक कुटी का दृश्य
    मदन टेर, वृंदावन के वन के अंदर एक कुटी का दृश्य
  9. मदन टेर, वृंदावन में वन का सुन्दर दृश्य
    मदन टेर, वृंदावन में वन का सुन्दर दृश्य
  10. मदन टेर, वृंदावन में वन के अंदर का दृश्य
    मदन टेर, वृंदावन में वन के अंदर का दृश्य
  11. मदन टेर, वृंदावन में प्राचीन वट वृक्ष के दर्शन
    मदन टेर, वृंदावन में प्राचीन वट वृक्ष के दर्शन
  12. मदन टेर, वृंदावन में एक पेड़ के नीचे बैठने की जगह
    मदन टेर, वृंदावन में एक पेड़ के नीचे बैठने की जगह
  13. मदन टेर, वृंदावन के अंदर बनाया गया सुन्दर रास्ता
    मदन टेर, वृंदावन के अंदर बनाया गया सुन्दर रास्ता
  14. चित्र में पद इस प्रकार लिखा है: "रसना कटौ जु अन रटौ, निरख अन फुटौ नैन, श्रवण फूटौ जु अन सुनौ, बिन राधा यश बैन" - हित हरिवंश महाप्रभु, स्फूट वाणी। श्री हित हरिवंश महाप्रभु के शब्दों में: "मेरी जीभ काट दी जाए अगर मैं श्री राधा के नाम के अलावा कुछ भी जप करूँ। राधारानी के रूप के अलावा अगर मुझे कुछ भी दिखाई दे तो मेरी आँखें फूट जाएँ। अगर मैं श्री राधा की महिमा के अलावा कुछ और सुनूँ तो मेरे कान फट जाएँ।
    चित्र में पद इस प्रकार लिखा है: "रसना कटौ जु अन रटौ, निरख अन फुटौ नैन, श्रवण फूटौ जु अन सुनौ, बिन राधा यश बैन" - हित हरिवंश महाप्रभु, स्फूट वाणी। श्री हित हरिवंश महाप्रभु के शब्दों में: "मेरी जीभ काट दी जाए अगर मैं श्री राधा के नाम के अलावा कुछ भी जप करूँ। राधारानी के रूप के अलावा अगर मुझे कुछ भी दिखाई दे तो मेरी आँखें फूट जाएँ। अगर मैं श्री राधा की महिमा के अलावा कुछ और सुनूँ तो मेरे कान फट जाएँ।
  15. मदन टेर, वृंदावन में प्रवेश द्वार पर "किशोरी तेरे चरणन की रज पाऊँ" पद लिखा है जहां मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने अपना भजन किया था।
    मदन टेर, वृंदावन में प्रवेश द्वार पर "किशोरी तेरे चरणन की रज पाऊँ" पद लिखा है जहां मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने अपना भजन किया था।
  16. इस स्थान पर स्थित एक सुंदर बगीचे में, श्री कृष्ण एक बार राधारानी और गोपियों के साथ लीला का आनंद ले रहे थे।  कहा जाता है कि कामदेव, जिन्हें मदन भी कहा जाता है, कृष्ण पर अपना आकर्षण का तीर चलाने के इच्छा से वहां पहुंचे। लेकिन कृष्ण को देखकर, वह उनकी दिव्य सुंदरता से इतने आकर्षित हो गए कि पूरी तरह से भ्रमित हो गए और चेतना शून्य हो जमीन पर गिर पड़े।
    इस स्थान पर स्थित एक सुंदर बगीचे में, श्री कृष्ण एक बार राधारानी और गोपियों के साथ लीला का आनंद ले रहे थे। कहा जाता है कि कामदेव, जिन्हें मदन भी कहा जाता है, कृष्ण पर अपना आकर्षण का तीर चलाने के इच्छा से वहां पहुंचे। लेकिन कृष्ण को देखकर, वह उनकी दिव्य सुंदरता से इतने आकर्षित हो गए कि पूरी तरह से भ्रमित हो गए और चेतना शून्य हो जमीन पर गिर पड़े।
  17. मदन टेर, वृंदावन में बयालीस लीला और भोरी सखी के पदों की झलक
    मदन टेर, वृंदावन में बयालीस लीला और भोरी सखी के पदों की झलक
  18. मदन टेर, वृंदावन में आसीस का पद लिखा गया है।
    मदन टेर, वृंदावन में आसीस का पद लिखा गया है।
  19. श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहाँ भजन किया था।
    श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहाँ भजन किया था।
  20. मदन टेर, वृंदावन में लता मंदिर की झलक जहां मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने भजन किया।
    मदन टेर, वृंदावन में लता मंदिर की झलक जहां मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने भजन किया।
  21. श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहां भजन किया था।
    श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहां भजन किया था।
  22. मदन टेर, वृन्दावन में वृन्दावन सत लीला की झलक।
    मदन टेर, वृन्दावन में वृन्दावन सत लीला की झलक।
  23. यहां हरिवंश का अर्थ सुन्दर रूप से वर्णित किया गया है। "ह" का अर्थ है कृष्ण, "र" का अर्थ है राधा, "वा" का अर्थ है वृंदावन, और "श" का अर्थ है सहचरी, जो इसे हरिवंश बनाता है।
    यहां हरिवंश का अर्थ सुन्दर रूप से वर्णित किया गया है। "ह" का अर्थ है कृष्ण, "र" का अर्थ है राधा, "वा" का अर्थ है वृंदावन, और "श" का अर्थ है सहचरी, जो इसे हरिवंश बनाता है।
  24. मदन टेर, वृंदावन में श्री हित हरिवंश जू की मंगल स्तुति
    मदन टेर, वृंदावन में श्री हित हरिवंश जू की मंगल स्तुति