मधुवन - ब्रज

मधुवन - ब्रज

मधुवन ब्रज के प्रसिद्ध 12 वनों में से एक है । सतयुग में मधु नामक एक दैत्यका भगवान ने यहाँ वध किया था । इस कारण भगवान का नाम मधुसूदन हो गया । अतः भगवान् श्रीमधुसूदन के नामपर इस वनका नाम मधुवन पड़ा है, क्योंकि यह मधुवन भगवान् श्रीमधुसूदन के समान ही प्रिय एवं मधुर है ।

मधोर्वनं प्रथमतो यत्र वै मथुरापुरी ।
मधुदैत्यो हतो यत्र हरिणा विश्वमूर्तिना ॥
- आदि वराह पुराण

मधुवनका वर्तमान नाम महोली ग्राम है । ग्रामके पूर्वमें ध्रुव टीला है। जिसपर बालक ध्रुव एवं उनके आराध्य चतुर्भुज नारायण का श्रीविग्रह विराजमान है । यही ध्रुवकी तपस्या स्थली है । यहींपर बालक ध्रुव ने देवर्षि नारद के दिये हुए मन्त्र के द्वारा भगवान की कठोर आराधना की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने उनको दर्शन दिया और छत्तीस हजार वर्षका एकछत्र भूमण्डल का राज्य एवं तत्पश्चात् अक्षय ध्रुवलोक प्रदान किया । ध्रुवलोक ब्रह्माण्डके अन्तर्गत ही श्रीहरिका एक अक्षय धाम है।

त्रेतायुगमें मधुदैत्य के अत्याचार से ऋषि-मुनि और यहाँ के निवासी बहुत भयभीत थे। उस दैत्यने शंकरजी की कठोर आराधना कर उनसे एक शूल प्राप्त किया था। वह शूल उसके हाथोंमें रहनेपर उसे देवता, दानव अथवा मनुष्य कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। वह सूर्यवंशका एक राजकुमार था। किन्तु कुसङ्गमें पड़कर बड़ा ही क्रूर और सदाचार विहीन हो गया । इसीलिए उसके पिताने उसे त्यज्य पुत्रके रूपमें अपने राज्यसे निकाल दिया था। वह मधुवनमें रहता था। मधुवनमें एक नये राज्यकी स्थापना कर वह सभीको उत्पीड़ित करने लगा। सूर्यवंशके महाप्रतापी राजा मान्धाताने उसे दण्ड देनेके लिए उसपर आक्रमण किया, किन्तु मधुदैत्यके शंकर प्रदत्त शूलके द्वारा वे भी मारे गये । अपनी मृत्युसे पूर्व दैत्यने उस शूलको अपने पुत्र लवणासुरको दिया और उससे कहा कि जब तक तेरे हाथों में यह शूल रहेगा, तुम्हें कोई नहीं मार सकता । अधिकन्तु शत्रु तुम्हारे इस अमोघ त्रिशूलके द्वारा मारा जायेगा । उस शूलको पाकर लवणासुर और भी भयंकर अत्याचारी हो गया । उसके अत्याचारोंसे त्रस्त होकर मधुवनके आस-पासके ऋषि महर्षि अयोध्यामें श्रीरामके समीप पहुँचे और दीन-हीन होकर लवणासुरसे अपनी रक्षाकी प्रार्थना की। उन्होंने लवणासुरके पराक्रम एवं अमोघ शूलके सम्बन्धमें भी सूचना दी। उन्होंने कहा कि वह उक्त शूलरहित अवस्थामें ही मारा जा सकता है, अन्यथा वह अजेय है।
भगवान् श्रीरामचन्द्रजी ने अपने छोटे भैया शत्रुघ्नजीको अयोध्यामें ही मधुवनके राज्यका राजतिलक किया । शत्रुघ्नजीने लंकासे लाये हुये प्रभावशाली श्रीवराह मूर्त्तिको पूजाके लिए माँगा । श्रीरामचन्द्रजीने सहर्ष वह वराहमूर्ति शत्रुघ्नजीको प्रदान की । शत्रुघ्नजी ऋषि महर्षियोंके साथ वाल्मीकि ऋषिके आश्रमसे होते हुए उनका आशीर्वाद लेकर मधुवन पहुँचे और धनुष - बाणके साथ लवणासुरकी गुफाके द्वारपर उस समय पहुँचे, जिस समय वह अपने शूलको गुफामें रखकर शिकारके लिए जंगलमें गया हुआ था। जब वह हाथी और बहुतसे मृग आदि जानवरोंका वधकर उन्हें लेकर अपने वासस्थानमें लौट रहा था, उसी समय शत्रुघ्नजीने उसे युद्धके लिए ललकारा । दोनोंमें भयंकर युद्ध छिड़ गया । वह किसी प्रकारसे अपना शूल लानेकी चेष्टा कर रहा था । किन्तु, महापराक्रमी शत्रुजयी शत्रुघ्नजीने उसे शूल ग्रहण करनेका समय नहीं दिया और अपने पैने बाणोंसे उसका सिर काट दिया । फिर उन्होंने उजड़ी हई मधुपुरीको पुनः बसाया और वहाँ भगवान् वराहदेवकी स्थापना की । ये आदिवराहदेव मथुरामें उसी स्थानपर विराजमान हैं ।
मधुवनमें भगवान् माधवका प्रिय मधुकुण्ड भी है, अब इसे कृष्णकुण्ड भी कहते हैं । एक समय गोचारण करते हुए गायों एवं सखाओं को प्यास लगी तो उन्होंने श्री कृष्ण के समक्ष प्रार्थना की, तब श्री कृष्ण ने अपनी वंशी से इस कुण्ड का निर्माण किया । श्री राधा कृष्ण ने इस कुण्ड में स्नान किया था । पास ही में लवणासुरकी गुफा है । यहीं कृष्णकुण्डके तटपर भगवान् शत्रुघ्नजीका दर्शनीय श्रीविग्रह है ।

द्वापर युग के अन्तमें श्रीकृष्ण लाखों गऊओंके पीछे उनका नाम धौली, धूमरी, कालिन्दी आदि पुकारते हुए हियो-हियो, धीरी - धीरी, तीरी - तीरी ध्वनि करते हुए दाऊ भैयाके साथ मधुर बांसुरी बजाते सखाओंके कन्धेपर हाथ रखे हँसते-हँसाते हुए कभी कुञ्जोंकी ओटसे ब्रजरमणियोंकी ओर सतृष्ण नेत्रोंसे कटाक्षपात करते हुए गोचारणके लिए जाते । गोचारणमें ग्वाल मण्डलीमें रसीली धूम मच जाती । इस प्रकार मधुवनमें जहाँ तहाँ सर्वत्र ही प्रेमका मधु बरसता था । गोचारण करते हुए श्रीकृष्ण श्रीबलरामजीके साथ उस प्रेम मधुको पानकर निहाल हो उठते । ब्रजरमणियाँ गोष्ठसे निकलते एवं लौटते समय कुञ्जोंकी आड़से, महलोंकी अटारियों और झरोखोंसे अपनी प्रेमभरी तिरछी चितवनोंसे कृष्णकी आरती उतारती थीं । कृष्ण उसे नेत्रभङ्गीसे स्वीकार करते । कृष्णके विरहमें ये ब्रजबधुएँ एक पलका समय भी करोड़ों युगोंके समान और मिलनमें एक युगका समय भी निमेषके समान अनुभव करती थीं । मधुवनमें गोचारणकी लीला भी मधुके समान मधुर और वर्णनातीत है । यहाँपर प्रतिवर्ष बहुतसी यात्राएँ विश्राम करती हैं ।

ऐसी किंवदन्ती है कि दाऊजी यहाँ मधुपानकर सखाओंके साथ नृत्य करते थे । आज भी यहाँ काले दाऊजीका विग्रह दर्शनीय है। इसका गूढ़ रहस्य यह है कि श्रीकृष्ण बलदेव वृन्दावन और मथुराको छोड़कर द्वारकामें परिजनोंके साथ वास करने लगे । उस समय ब्रज एवं ब्रजवासियोंका श्रीकृष्ण विरहसे व्याकुलताकी बात सुनकर बलदेवजीने कृष्णको साथ लेकर ब्रजमें जानेकी इच्छा व्यक्त की । किन्तु किसी कारण से श्रीकृष्णके जानेमें विलम्ब देखकर वे अकेले ही ब्रजमें पधारे और सबको यथासाध्य सान्त्वना देनेकी चेष्टा की । किन्तु ब्रजवासियोंकी विरह दशा देखकर स्वयं भी कृष्ण - विरहमें कातर हो गये । कृष्णकी ब्रजलीलाओंका चिन्तन करते हुए श्यामरस पान करते हुए एवं श्यामकी चिन्ता करते हुए, स्वयं श्याम अंगकान्तिवाले हो गये । यह श्यामरस ही मधु है, जिसे बलदेव सतत पानकर कृष्ण-प्रेममें विभोर रहते हैं ।

स्थान :
श्री मथुरा के दक्षिण-पश्चिमी भाग में, श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर से 4 km दूर मधुवन स्थित है ।
  1. मधुवन - ब्रज में भगवान नारायण के ध्रुव के साथ के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान नारायण के ध्रुव के साथ के दर्शन ।
  2. मधुवन - ब्रज में ध्रुव टीला की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ ।
    मधुवन - ब्रज में ध्रुव टीला की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ ।
  3. मधुवन - ब्रज स्थित श्री गोपाल गिरिराज मंदिर में कीर्तन व नृत्य करते श्रद्धालु ।
    मधुवन - ब्रज स्थित श्री गोपाल गिरिराज मंदिर में कीर्तन व नृत्य करते श्रद्धालु ।
  4. मधुवन - ब्रज में भगवान गोपाल गिरिराज जी के निकट के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान गोपाल गिरिराज जी के निकट के दर्शन ।
  5. ब्रज के मधुवन में कृष्ण कुण्ड में बैठा एक तोता ।
    ब्रज के मधुवन में कृष्ण कुण्ड में बैठा एक तोता ।
  6. मधुवन - ब्रज में एक गौशाला में गायों का दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में एक गौशाला में गायों का दृश्य ।
  7. मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल का प्रवेश ।
    मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल का प्रवेश ।
  8. मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक शीतल दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक शीतल दृश्य ।
  9. मधुवन - ब्रज में ध्रुव टीला को जाने वाला मार्ग ।
    मधुवन - ब्रज में ध्रुव टीला को जाने वाला मार्ग ।
  10. मधुवन - ब्रज में भगवान शत्रुघ्न और माता श्रुतकीर्ति के निकट के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान शत्रुघ्न और माता श्रुतकीर्ति के निकट के दर्शन ।
  11. ब्रज के मधुवन में कृष्ण कुण्ड में विश्राम करते श्रद्धालु ।
    ब्रज के मधुवन में कृष्ण कुण्ड में विश्राम करते श्रद्धालु ।
  12. मधुवन - ब्रज में श्री ध्रुव नारायण मंदिर का प्रवेश द्वार ।
    मधुवन - ब्रज में श्री ध्रुव नारायण मंदिर का प्रवेश द्वार ।
  13. मधुवन - ब्रज में भगवान शिव और हनुमान मंदिर का दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान शिव और हनुमान मंदिर का दृश्य ।
  14. मधुवन - ब्रज में भगवान नारायण के मध्य में दर्शन, ऋषि नारद के दाईं ओर, और ध्रुव के बाईं ओर के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान नारायण के मध्य में दर्शन, ऋषि नारद के दाईं ओर, और ध्रुव के बाईं ओर के दर्शन ।
  15. मधुवन - ब्रज में श्री ध्रुव नारायण मंदिर का नाम पट्ट ।
    मधुवन - ब्रज में श्री ध्रुव नारायण मंदिर का नाम पट्ट ।
  16. मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड के पास श्री चैतन्य महाप्रभु के एक चित्र का दृश्य । मधुवन - ब्रज में मध्य में श्री दाऊजी (भगवान बलराम) के दर्शन, बाईं ओर माता रेवती, और दाईं ओर माता वारुणी के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड के पास श्री चैतन्य महाप्रभु के एक चित्र का दृश्य । मधुवन - ब्रज में मध्य में श्री दाऊजी (भगवान बलराम) के दर्शन, बाईं ओर माता रेवती, और दाईं ओर माता वारुणी के दर्शन ।
  17. मधुवन - ब्रज में श्री दाऊजी मंदिर का प्रवेश द्वार ।
    मधुवन - ब्रज में श्री दाऊजी मंदिर का प्रवेश द्वार ।
  18. मधुवन - ब्रज में भगवान गोपाल गिरिराज जी के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में भगवान गोपाल गिरिराज जी के दर्शन ।
  19. मधुवन - ब्रज में श्री गोपाल गिरिराज मंदिर का प्रवेश द्वार ।
    मधुवन - ब्रज में श्री गोपाल गिरिराज मंदिर का प्रवेश द्वार ।
  20. मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड में दाना खाते पक्षी ।
    मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड में दाना खाते पक्षी ।
  21. मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक शांत दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक शांत दृश्य ।
  22. मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल का दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल का दृश्य ।
  23. मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल के दर्शन ।
    मधुवन - ब्रज में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के बैठक स्थल के दर्शन ।
  24. मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक सुंदर दृश्य ।
    मधुवन - ब्रज में कृष्ण कुण्ड का एक सुंदर दृश्य ।