नागरीदास कुटीर, बरसाना

नागरीदास कुटीर, बरसाना

नागरीदास जी राधारानी के अनन्य भक्त थे | नागरीदास जी ने बरसाने में गहवर वन में अपनी कुटिया बनाई जो आज मोर कुटी के नाम से प्रसिद्ध है एक दिन इसी स्थान पर उन्होंने अष्टसखियों सहित श्री राधा रानी के प्रत्यक्ष दर्शन हुए | नागरीदास जी प्रेम और सौंदर्य की अंतिम सीमा श्री किशोरीजी के साक्षात् दर्शन कर मूर्छित हो गए| उस स्थिति में श्री राधा ने उनसे कहा हम नित्य प्रति यहाँ खेलने आती हैं हमें अर्द्धरात्रि में भूख लगती है इस समय यदि हमें कुछ भोजन कराओ तो शांति हो हमको | इन्होने यही बात अपने पदों में लिखी है:
"भूखे हैं हम आधी रैन, या बिरियाँ स्वबावै तब चैन”
नागरीदास जी परम हर्षित होकर उसी समय श्री राधा को भोजन कराया और उसी दिन से अर्ध रात्रि के समय खीर और पूड़ियों का भोग रखने लगे|
  1. रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से मोरकुटी जाने वाली सीढ़ियाँ। कुटीर से नीचे जाते हुए यह सीढ़ी बरसाना के गहवर वन में राधा सरोवर की ओर पहुँचेंगी।
    रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से मोरकुटी जाने वाली सीढ़ियाँ। कुटीर से नीचे जाते हुए यह सीढ़ी बरसाना के गहवर वन में राधा सरोवर की ओर पहुँचेंगी।
  2. रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से बरसाना का दृश्य।
    रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से बरसाना का दृश्य।
  3. गहवर वन में रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से श्री राधासरोवर की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ।
    गहवर वन में रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर से श्री राधासरोवर की ओर जाने वाली सीढ़ियाँ।
  4. रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर के पास एक भक्त।
    रसिक संत श्री नागरीदास जी की भजन कुटीर के पास एक भक्त।
  5. गहवर वन, बरसाना में मोरकुटी के पास भजन कुटीर में नागरीदास के दर्शन।
    गहवर वन, बरसाना में मोरकुटी के पास भजन कुटीर में नागरीदास के दर्शन।
  6. गहवर वन, बरसाना में मोरकुटी के पास नागरीदास के कुटीर में ठहरे हुए एक विरक्त संत।
    गहवर वन, बरसाना में मोरकुटी के पास नागरीदास के कुटीर में ठहरे हुए एक विरक्त संत।