निधिवन:
इस पवित्र कुंज में दिव्य युगल राधा और कृष्ण रास लीला का प्रदर्शन करते थे। इसलिए इसे रास स्थली कहा जाता है। यह ब्रज रसिक स्वामी श्री हरिदास जी की साधना स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। लगभग 20 तंग सीढ़ियों नीचे एक कुंड है जिसे श्री कृष्ण ने विशाखा सखी की प्यास को मिटाने के लिए अपनी बांसुरी की मदद से स्वयं बनाया था। इसलिए इसे विशाखा-कुंड के नाम से जाना जाता है। यह भी माना जाता है कि समस्त वृक्ष गोपी स्वरुप ही हैं। राधा रानी की कृपा से गोपी का रूप धारण करके दिव्य युगल की दिव्य लीला में प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ एक छोटा मंदिर है जो राधा रानी का श्रृंगार-घर है जिसे रंग महल कहा जाता है। जहां उनके लिए आराम करने के लिए एक बिस्तर (शैया) रखा जाता है। यह भी माना जाता है कि श्री कृष्ण राधा रानी को सजाते हैं। यहाँ बांके बिहारी प्रकट स्थली नामक एक मंदिर है जहां बांके बिहारी की दिव्य मूर्ति रसिक संत स्वामी श्री हरिदास जी ने संगीत साधना द्वारा प्रकट की थी। यहां एक और मंदिर है जिसे "बंसी चोर राधा रानी" कहा जाता है क्योंकि वहां राधा रानी श्री कृष्ण की बांसुरी को चुराती हैं। यहाँ दुनिया का एकमात्र मंदिर है जहां राधा रानी बांसुरी बजा रही है। रास लीला स्थली, यह एक जगह है यह माना जाता है कि राधा और कृष्ण रास लीला का प्रदर्शन करते हैं।
मंदिर का समय:
गर्मी
सवेरे 5:00 बजे - मंगला आरती
शाम 7:30 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [5:30 PM]
सर्दी
सवेरे 6:00 बजे - मंगला आरती
शाम 7:00 बजे - शयन आरती
समाज गायन - [5:00 PM]