निकुंज वन, वर्तमान में सेवा कुंज, वृंदावन के बारह छोटे वनों में से एक वन है । सेवा कुंज को पहले निकुज वन भी कहा जाता था । पुराणों के अनुसार सेवा कुंज वृंदावन के विशाल उपवनो के सभी बारह उपवनो के केंद्र को दर्शाता है।
पुराणों के अनुसार, यमुना नदी से घिरा हुआ पूरा क्षेत्र, मोहन चीर घाट से आदि-बरहा घाट तक सेवा कुंज या निकुंज वन के रूप में जाना जाता था। इसलिए, कालिया-घाट, मदन-मोहन, इम्ली तला, राधा दामोदर, श्रृंगार वट, गोविंद घाट, चेहाना घाट, केशी घाट, निधिवन, झुलनवन, गोपीनाथ, धीर समीर, वंशीवट, गोपीश्वर, ब्रह्मा-कुंड, गोविंदा कुंड जैसे स्थान और गोविंद जी योग-पीठ को भी निकुंज वन के भीतर अलग-अलग लीला स्थली के रूप में माना जाता है।
इस विशेष घने वन में, युगल सरकार नित्य रासलीला करते हैं । उसके बाद श्री कृष्ण श्री राधा रानी के चरण कमलों की सेवा करते हैं । उन्हें लाल सिंदूर से श्रृंगार करते हैं और उनके लम्बे काले केशो का श्रृंगार करते हैं । श्री राधा रानी के मुख चंद्र पर रचना करते हैं, उनको रेशमी वस्त्र पहनाते हैं और मणि-जड़ित आभूषणों के साथ श्रृंगार करते हैं । रास-नृत्य संपन्न होने पर सखियाँ फूलों की पंखुड़ियों से बने कोमल शैय्या का निर्माण करती हैं जिसके पश्चात राधा और कृष्ण को एक साथ विराजमान होने के लिए आमंत्रित करतीं हैं । पूरे क्षेत्र में जहां यह दिव्य रास लीला निरंतर होती है उसे निकुंज वन या सेवा कुंज कहतें हैं।
श्री कृष्ण की मुरली के अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने यहाँ भजन किया है, और उनकी समाधि भी इधर है।
मंदिर का समय:
गर्मी
सवेरे 5:30 बजे - मंगला आरती
सवेरे 8:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 5:30 बजे - संध्या आरती
शाम 7:15 बजे - शयन आरती
सर्दी
सवेरे 7:00 बजे - मंगला आरती
सवेरे 9:00 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:00 बजे - राजभोग आरती
शाम 4:30 बजे - संध्या आरती
शाम 6:30 बजे - शयन आरती