श्री श्री राधा दामोदर मंदिर 1542 ईसवी में श्री जीव गोस्वामी द्वारा स्थापित एक प्राचीन मंदिर है। राधा दामोदर की सेवा श्री जीव गोस्वामी द्वारा की जाती थी।
श्री राधा दामोदर को श्रील रूप गोस्वामी द्वारा प्रकट किया जिन्हे उन्होंने सेवा और पूजा के लिए अपने प्रिय शिष्य और भतीजे-जीव गोस्वामी को दिया। श्री रूप गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी की समाधि। श्री रूप गोस्वामी के भजन कुटिया और समाधि: श्री श्री राधा-कृष्ण की शीर्ष सेवक श्री रूप मंजरी हैं। उनका भजन-कुटिया और समाधि-मंदिर श्री श्री राधा दामोदर मंदिर के आंगन में स्थित हैं।
जीव गोस्वामी समाधि: जीव गोस्वामी की समाधि राधा दामोदर मंदिर में स्थित है।
श्रीला कृष्ण दास कविराज गोस्वामी समाधि: श्रीला कृष्ण दास कविराज गोस्वामी की समाधि राधा दामोदर मंदिर में भी स्थित है। अन्य वैष्णव संतों की पुष्प समाधि भी मंदिर में स्थित हैं।
गिरिराज चरण शिला इतिहास: श्रीपाद सनातन गोस्वामी श्री राधा मदनमोहन मंदिर के पास वृंदावन में रहते थे। हर दिन वह परिक्रमा के लिए वृंदावन से गोवर्धन जाते थे। जब वह बूढ़े हो गए तब भी वहां मार्ग पर चलते थे और परिक्रमा किया करते थे और यह देखकर यह भगवान स्वयं उनके सामने प्रकट हुए और उसे बताया कि वह उनकी भक्ति से खुश हैं और वृंदावन में रहने और राधा कृष्ण की सेवा करने के लिए गोस्वामी पाद जी से कहा। श्रील सनातन गोस्वामी ने कहा कि गोवर्धन न आने आने पर उन्हें दर्द और दुःख महसूस होता है। तब श्री कृष्ण ने उन्हें अपने चरण चिन्ह, बांसुरी, छड़ी और गायों के चरण चिन्ह के साथ एक गोवर्धन शिला दी और गोस्वामी पाद को बताया कि इस गोवर्धन शीला के चार चिन्ह के साथ आपको गोवर्धन परिक्रमा का पूरा लाभ मिलेगा। तब से इस मंदिर में इस शिला को स्थापित किया गया है। कई भक्त मंदिर परिक्रमा करने के लिए इस मंदिर में आते हैं।
मंदिर का समय:
सवेरे 4:45 बजे - मंगला आरती
सवेरे 8:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:30 बजे - राजभोग आरती
शाम 6:00 बजे - संध्या आरती
शाम 9:00 बजे - शयन आरती
स्थान:
राधा दामोदर मंदिर, सेवा कुंज के नज़दीक निकुंज वन में वृंदावन में स्थित है।