सूर कुटी, रुनकता

सूर कुटी, रुनकता

सूर कुटी एक महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थली है । यह वह स्थान है जहां प्रसिद्ध भक्त, महाकवि श्री सूरदास जी ने भजन किया था और वल्लभाचार्य जी से दीक्षा प्राप्त की थी । इस स्थान पर एक कुआं है, जिसमें श्री सूरदास जी भूल से गिर गए थे, और श्री कृष्ण ने उनकी रक्षा की थी । वर्तमान में, मथुरा में स्थित कीथम बियर पार्क, स्थली के भीतर से इसका मार्ग है । आसपास के क्षेत्र में सुंदर कीथम झील और हरे-भरे वन हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं । इस स्थान पर  विशाल सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य (बर्ड सेंचुरी) भी बनाया गया है जिसमें विभिन्न प्रकार के पक्षियों की प्रजातिओं को सुरक्षित कर रखा गया है ।वृन्दावन से लगभग 55 किमी दूर स्थित यह स्थान एक शांत और मनोरम अनुभव प्रदान करता है ।

यह स्थान गऊ घाट में स्थित है, जो लगभग मथुरा एवं आगरे के मध्य श्री यमुना किनारे स्थित है। एक समय यहाँ श्री वल्लभाचार्य जी पधारे । यहीं सूरदास जी रहते थे । सूरदास जी के अनेक सेवक थे, जिसमें से एक सेवक ने श्री वल्लभाचार्य जी के आगमन की सूचना दी । सूरदास जी ने आचार्य जी का नाम सुनते ही उनके दर्शन करने के लिए चले । सूरदास जी आचार्य जी के निकट आये, दण्डवत कर कुछ दूर पर बैठ गए । आचार्य जी ने सूरदास जी से कहा "सूर, आओ, यहाँ पास में बैठो ।" सूरदास जी निकट चले आये और बैठ गए । तब आचार्य जी ने कहा "सूर, कुछ भगवद यश वर्णन करो ।"
यह सुनकर सूरदास जी पद गाने लगे - 

"हौं हरि सब पतितन कौ नायक ।
को करि सकै बराबरि मेरी और नहीं कोउ लायक ।" 

यह सुनकर आचार्य जी ने कहा "तुम सूर होके ऐसे घिघिया क्यों रहे हो, कुछ भगवद लीला वर्णन करो ।" सूरदास जी लीला गान में असमर्थ थे क्यूंकि उन्हें लीला दर्शन नहीं होता था । श्री वल्लभाचार्य जी ने सूरदास जी को श्रीमदभागवतम के दशम स्कंध की अनुक्रमाणिका सुनाई एवं ब्रह्म-सम्बन्ध कराया । अब सूरदास जी को श्री कृष्ण की समस्त लीलाओं का ह्रदय में दर्शन होने लगा, तब उन्होंने गाया -

"चकई से चलि चरन सरोवर जहाँ न प्रेम बिछोह ।"
                              
स्थान :
सूर कुटी मथुरा से 40 किमी दक्षिण में कीथम में यमुना किनारे गऊ घाट पर स्थित है ।
  1. सूर कुटी, रुनकता के पास बहती यमुना के दर्शन ।
    सूर कुटी, रुनकता के पास बहती यमुना के दर्शन ।
  2. रुनकता में सूर कुटी के पास बहती यमुना का दृश्य ।
    रुनकता में सूर कुटी के पास बहती यमुना का दृश्य ।
  3. कीठम में यमुना किनारे गऊ घाट ।
    कीठम में यमुना किनारे गऊ घाट ।
  4. रुनकता के सूर कुटी में आराम करता बछड़ा ।
    रुनकता के सूर कुटी में आराम करता बछड़ा ।
  5. सूर कुटी, रुनकता में एक संत की समाधि का दृश्य ।
    सूर कुटी, रुनकता में एक संत की समाधि का दृश्य ।
  6. सूर कुटी, रुनकता में वन का दृश्य ।
    सूर कुटी, रुनकता में वन का दृश्य ।
  7. रुनकता में सूर कुटी के पास एक संत का भजन स्थल ।
    रुनकता में सूर कुटी के पास एक संत का भजन स्थल ।
  8. सूर कुटी, रुनकता में यमुना के पास गऊ घाट पर हनुमान मंदिर ।
    सूर कुटी, रुनकता में यमुना के पास गऊ घाट पर हनुमान मंदिर ।
  9. श्री सूरदास जी और वल्लभाचार्य जी की लीलाएँ सूर कुटी, रुनकता में संगमरमर पर अंकित हैं ।
    श्री सूरदास जी और वल्लभाचार्य जी की लीलाएँ सूर कुटी, रुनकता में संगमरमर पर अंकित हैं ।
  10. सूर कुटी, रुनकता में श्रीनाथजी के दर्शन।
    सूर कुटी, रुनकता में श्रीनाथजी के दर्शन।
  11. सूर कुटी, रुनकता का रास्ता ।
    सूर कुटी, रुनकता का रास्ता ।
  12. सूर कुटी, रुनकता के निकट एक सुन्दर विश्राम स्थल ।
    सूर कुटी, रुनकता के निकट एक सुन्दर विश्राम स्थल ।
  13. सूर कुटी, रुनकता में शिव लिंग के दर्शन।
    सूर कुटी, रुनकता में शिव लिंग के दर्शन।
  14. सूर कुटी, रुनकता के निकट मंदिरों का दृश्य ।
    सूर कुटी, रुनकता के निकट मंदिरों का दृश्य ।
  15. सूर कुटी, रुनकता में श्री सूरदास जी की मूर्ति ।
    सूर कुटी, रुनकता में श्री सूरदास जी की मूर्ति ।
  16. इस कुएं में सूरदास जी दुर्घटनावश गिर गये थे और श्रीकृष्ण ने उनके प्राणों की रक्षा की और अंतर्ध्यान हो गए । तब सूरदास जी ने यहाँ यह पद गाया :  कर छुटकाए जात हौ, निबल जानि कर मोहि। हिरदय सों जब जाहुगे, मरद बदींगो तोहि॥   हे श्याम सुंन्दर, मुझे निर्बल जान कर मेरी बाहें छुड़ाकर जा रहे हो, हिम्मत हो तो मेरे हृदय से निकल कर दिखाओ तो तुम्हें मर्द मानूँ [यह एक व्यंग है]।
    इस कुएं में सूरदास जी दुर्घटनावश गिर गये थे और श्रीकृष्ण ने उनके प्राणों की रक्षा की और अंतर्ध्यान हो गए । तब सूरदास जी ने यहाँ यह पद गाया : कर छुटकाए जात हौ, निबल जानि कर मोहि। हिरदय सों जब जाहुगे, मरद बदींगो तोहि॥ हे श्याम सुंन्दर, मुझे निर्बल जान कर मेरी बाहें छुड़ाकर जा रहे हो, हिम्मत हो तो मेरे हृदय से निकल कर दिखाओ तो तुम्हें मर्द मानूँ [यह एक व्यंग है]।
  17. सूर कुटी, रुनकता में एक मंदिर का दृश्य ।
    सूर कुटी, रुनकता में एक मंदिर का दृश्य ।
  18. सूर कुटी, रुनकता का दृश्य ।
    सूर कुटी, रुनकता का दृश्य ।
  19. सूर कुटी, रुनकता में चरति हुई एक गाय ।
    सूर कुटी, रुनकता में चरति हुई एक गाय ।
  20. सूर कुटी, रुनकता के दर्शन ।
    सूर कुटी, रुनकता के दर्शन ।
  21. सूर कुटी, रुनकता में सूरदास जी सहित श्री राधा कृष्ण के दर्शन ।
    सूर कुटी, रुनकता में सूरदास जी सहित श्री राधा कृष्ण के दर्शन ।
  22. कीठम में यमुना किनारे गऊ घाट का दृश्य ।
    कीठम में यमुना किनारे गऊ घाट का दृश्य ।
  23. सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य में स्थित मोर का दृश्य ।
    सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य में स्थित मोर का दृश्य ।
  24. सूर कुटी, रुनकता की ओर जाता सुन्दर रास्ता ।
    सूर कुटी, रुनकता की ओर जाता सुन्दर रास्ता ।