सातवें आचार्य श्री ललित किशोरी देव जी इस धरती पर १७५८ से १८२३ के बीच एकांत वृक्ष के नीचे कहीं जाकर ध्यान करने के लिए निवास करना चाहते थे। उन्होंने बांस के डंडों से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। इस प्रकार इस स्थान का नाम टटिया स्थान पड़ा।