श्री राधिकाजी यमुना के मध्य खिले हुए कमलों के बीच एक कमलासन पर विराजमान हैं। शीतल चाँदनी रात में, वृंदावन की मधुर शांति में वे बंसी (बांसुरी) बजा रही हैं। चारों ओर खिले हुए कमल उनकी अनुपम छवि को और भी मनोहारी बना रहे हैं।