यमुना जी के शांत जल के तट पर विराजमान, श्री राधा रानी लज्जावश अपनी दृष्टि नीचे किए हुए हैं, जबकि श्री कृष्ण हाथ जोड़े उनके अत्यंत समीप बैठे हैं और उनकी प्रसन्नता पाने के लिए कोमलता से अनुनय-विनय कर रहे हैं; और उनके चारों ओर का संपूर्ण पुष्पित कुंज उनके इस मधुर एवं प्रेममयी आदान-प्रदान के वातावरण में अत्यंत सुंदरता से सराबोर हो उठा है।

यमुना जी के शांत जल के तट पर विराजमान, श्री राधा रानी लज्जावश अपनी दृष्टि नीचे किए हुए हैं, जबकि श्री कृष्ण हाथ जोड़े उनके अत्यंत समीप बैठे हैं और उनकी प्रसन्नता पाने के लिए कोमलता से अनुनय-विनय कर रहे हैं; और उनके चारों ओर का संपूर्ण पुष्पित कुंज उनके इस मधुर एवं प्रेममयी आदान-प्रदान के वातावरण में अत्यंत सुंदरता से सराबोर हो उठा है।