एक सुसज्जित आसन पर रूठकर बैठी हुईं श्री राधा रानी श्री कृष्ण से अपना मुख फेर लेती हैं; वहीं उनकी सखी उनके समर्थन में पास ही खड़ी है और श्री कृष्ण हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्वक घुटनों के बल बैठे उन्हें मनाने की मनुहार कर रहे हैं।

एक सुसज्जित आसन पर रूठकर बैठी हुईं श्री राधा रानी श्री कृष्ण से अपना मुख फेर लेती हैं; वहीं उनकी सखी उनके समर्थन में पास ही खड़ी है और श्री कृष्ण हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्वक घुटनों के बल बैठे उन्हें मनाने की मनुहार कर रहे हैं।