
भांडीरवन
मत्स्य पुराण के अनुसार भाण्डीरवन का प्रार्थना मन्त्र : चतुर्द्दशावताराणां लीलोद्भवस्वरूपिणे । नानाद्रव्योद्भवस्थान नमो भाण्डीरसंज्ञिके ॥ “हे 14 अवतारों की लीलाओं द्वारा उत्पत्ति स्वरूप ! अनेकानेक द्रव्यों के उत्पत्ति स्थान भांडीर नामक तीर्थ! आपको प्रणाम है।” स्कन्ध पुराण के अनुसार भाण्डीरवन का प्रार्थना मन्त्र : मनोर्थवरदे तीर्थे असिभाण्डहृदाव्हये । नमो गोप्यजलाल्हादे तीर्थराज नमोस्तु ते ॥ “हे मनोवांछित वर प्रदान करने वाले, असिभांड नामक तीर्थ, हे गोप्य जल से आनन्द प्राप्त, आपको प्रणाम है।” भण्डिरवन श्री कृष्ण की विविध प्रकार की मधुर लीलाओं की स्थली है । ब्रज के बारह वनों में से यह एक प्रमुख वन है । यहाँ कई लीला स्थली है, जैसे कि भंडिरवट (ब्रह्मा जी द्वारा संपन्न किया गया श्री राधा कृष्ण का विवाह स्थान), वेणुकुप (एक कुआं, जिसे कृष्ण ने अपनी वंशी से बनाया था जिससे वे स्वयं को वत्सासुर वध के पाप से मुक्त कर सकें, जो गाय के रूप में आया था), वंशीवट (महारास स्थली), मल्ल युद्ध का स्थान, श्रीदामा का मंदिर, श्याम-तलैया (एक तालाब, जिसे कृष्ण ने गोपियों की प्यास बुझाने के लिए अपनी वंशी से बनाया था), चाहेरी गाँव (वह स्थान जहाँ कृष्ण अपने मित्रों के संग वृक्षों की छाया में विश्राम करने आते थे), और अगियारा गाँव। वह स्थान जहां सभी प्रकार के तत्व-ज्ञान, ऐश्वर्य और माधुर्यपूर्ण लीला माधुरियों का सम्पूर्ण रूप से प्रकाश हो, उसे भण्डिरवन कहते हैं ।
