गोकुल महावन

गोकुल महावन

गोकुल को बृहदवन भी कहा जाता है क्योंकि यह ब्रज के सभी वनों में सबसे बड़ा (बृहद) है। वास्तव में, इस वन के तीन नाम हैं: महावन, गोकुल और बृहदवन । यह गोकुल गोलोक से भिन्न नहीं है । नंद के पिता गोपराज परजन्य, आरम्भ में नंदगांव में रहते थे, जहां उनके पांच पुत्र थे - उपानंद, अभिनंद, नंद, सुनंद और नंदन - और दो पुत्री जिनका नाम सनंदा और नंदना था । साथ ही नंदगांव में रहकर उन्होंने अपने सभी पुत्र-पुत्रियों का विवाह कर दिया । उनके मध्यम पुत्र, नंद की कोई संतान नहीं थी, जिससे परजन्य गोप को बहुत चिंता हुई । उन्होंने भगवान नारायण की इस आशा में पूजा की कि नंद एक बालक के पिता बनें । आकाशवाणी से उन्हें पता चला कि श्री नंदजी के घर एक अति वीर पुत्र का जन्म अतिशीघ्र होगा । यह पुत्र सभी गुणों से संपन्न होगा और सभी असुरों का नाश करेगा । इस आकाशवाणी के कुछ समय बाद, केशी और अन्य असुर नंदगांव में उत्पात करने लगे । परजन्य गोप अपने परिवार और अपने सभी रिश्तेदारों के साथ यहां गोकुल चले आये । यमुना गोकुल के पास से ही बहती है । यह वन विभिन्न प्रकार के वृक्षों से सुसज्जित है, सुन्दर-सुन्दर पुष्पों की लताएँ हैं, और गायों को चरने के लिए हरे-भरे घास के मैदान हैं । इस सुंदरता को देखकर, व्रजवासी गोप समूह बहुत प्रसन्न हुए और खुशी-खुशी यहां निवास करने लगे । मध्यरात्रि को माता यशोदा ने नंद-महल के प्रसव कक्ष में जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया, कृष्ण और योगमाया । गर्भनाल काट दी गई और अन्य वैदिक शुद्धिकरण यहीं संपन्न हुए । कृष्ण ने यहीं पूतना, त्रिणावर्त और शाकटासुर का वध किया एवं उन्हें मुक्ति प्रदान की । कृष्ण और बलराम के नामकरण संस्कार नन्द भवन के पास के गौशाला में समारोह के साथ संपन्न हुआ । यहीं बलराम और कृष्ण घुटनों के बल चलते थे, यहीं गोकुल में माता यशोदा ने शरारती कृष्ण को ऊखल से बांधा था, और यहीं कृष्ण ने यमलाअर्जुन वृक्ष को श्राप-मुक्त किया था । गोकुल में ही कृष्ण और बलराम की बाल-लीलाएं हुई थीं । स्थान : गोकुल मथुरा से लगभग 9 km पूर्व में स्थित है ।