
काम्यवन
श्री राधामाधव की परम पावनी लीलास्थलियों को अपनी सीमाओं में संजोये तथा आज भी वन, सरोवर, वापी, तड़ाग व विविध गिरिशिखरों एवं उनकी सुरम्य कन्दराओं से आच्छादित काम्यवन (कामां) ब्रज की पश्चिम दिशा में स्थित है । "ब्रज के बारह वनों में चतुर्थ वन कामवन है, जिसके विषय में कहावत है कि "कामवन जाये ते काम बन जात है"। काम अर्थात् समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करनेवाला यह कामवन है, जो श्रीकृष्ण की दिव्य कामना को भी पूरा करता है । यहीं श्रीराधाकृष्ण के अप्राकृत प्रेम की अभिव्यक्ति हुई है ।" चतुर्थं काम्यकवनं वनानाम् वनमुत्तमम् । तत्र गत्वा नरो देवि मम लोके महीयते ॥ - आदि वराह पुराण (153/37) काम्यवन की महत्ता इसी से स्वतः प्रतिपादित हो जाती है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता के तीर्थाटन की कामना को इसी काम्यवन में भारत के समस्त प्रमुख तीर्थों को निवास देकर पूरा किया, तभी तो काम्यवन में आदिबद्री, केदारनाथ, प्रयाग, गया, लंका, सेतुबंधरामेश्वर, काशी आदि अनेक तीर्थ आज भक्तों की आस्था के केंद्र बने हुए हैं । काम्यवन की परिक्रमा 21 किलोमीटर के अन्तर्गत है । विष्णु पुराण के अनुसार यहाँ चौरासी कुण्ड, चौरासीतीर्थ, चौरासी मंदिर एवं चौरासी खम्बे हैं । ब्रज के प्रसिद्ध ठाकुर श्री राधागोविंद, राधागोपीनाथ, श्रीराधामदनमोहन, श्री राधादामोदर, श्री राधामाधव एवं श्री गोविन्द देव जी ने भी औरंगजेब के अत्याचार के समय जयपुर जाते समय कुछ दिनों तक यहीँ काम्यवन में विश्राम किया था । वृन्दादेवी तो काम्यवन आकर वहाँ से गयी ही नहीं । इसके अतिरिक्त महाभारत काल में पाण्डवों के अज्ञातवास के समय पाण्डवों ने काम्यवन में भी बहुत दिनों तक निवास किया था । आज भी उनके नाम से धर्मकुण्ड, भीमकुण्ड, पञ्चतीर्थ (पाँचों पाण्डवों के पाँच कुण्ड), यज्ञ कुण्ड, धर्मराज सिंहासन आदि अनेक स्थान हैं । भीमपत्नी हिडिम्बा का भी स्थान ग्राम अंगरावली में पर्वत किनारे बना हुआ है । ब्रज में महाभारत के अनेक पात्रों का आना सिद्ध हो जाता है जैसे रंकु वन में सुभद्रा कुण्ड । कृष्ण की बहन या अर्जुन की पत्नी सुभद्रा जी आई हैं और उनके नाम का वहाँ कुण्ड भी है । श्री 'गर्ग संहिता' वृन्दावन खंड में भीष्म ने महाराज पाण्डु से ब्रज की महिमा का वर्णन किया था । अनेक यूथों की गोपियाँ जिनकी भगवद् मिलन की कामना रामावतार में पूरी नहीं हुयी, वे भी इसी क्षेत्र में आकर रास में श्रीकृष्ण से मिलीं । काम्यवन में श्री विमल कुंड प्रमुख कुंड है और सब मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले कामेश्वर महादेव प्रसिद्ध हैं । स्थान : काम्यवन (कामवन अथवा कामां) मथुरा से 60 km और बरसाना से 13 km की दूरी पर, ब्रज के पश्चिम दिशा में, राजस्थान में स्थित है ।
