
नंदगाँव
नन्दगाँव में ब्रजराज श्रीनन्द महाराज जी का राजभवन है । यहाँ श्रीनन्दराय, उपानन्द, अभिनन्द, सुनन्द तथा नन्दने वास किया है, इसलिए यह नन्दगाँव सुखद स्थान है । नन्दगाँव की प्रदक्षिणा चार मीलकी है । यहाँपर कृष्णलीलाओंसे सम्बन्धित 56 कुण्ड हैं, जिनके दर्शन में 3-4 दिन लग जाते हैं । देवाधिदेव महादेव शंकरने अपने आराध्यदेव श्रीकृष्णको प्रसन्नकर यह वर माँगा था कि मैं आपकी बाल्य लीलाओंका दर्शन करना चाहता हूँ। स्वयं भगवान् श्रीकृष्णने नन्दगाँवमें उन्हें पर्वताकारमें स्थित होनेका आदेश दिया। श्रीशंकर महादेव भगवान के आदेश से नन्दगाँव में नन्दीश्वर पर्वत के रूपमें स्थित होकर अपने आराध्यदेवके आगमनकी प्रतीक्षा करने लगे । पहले श्रीनन्दरायजी के पूर्वज, यहीं नन्द ग्राम के ही निवासी रहे हैं । किसी कारणवश वे बाद में गोकुल जाकर बस गये । श्रीकृष्ण प्राकट्य के समय, वे गोकुल में ही विराजमान थे । श्रीनन्द जी गोकुल में राक्षसों के उत्पातों से रक्षा हेतु अपने लाला कन्हैया, अन्य गोप समूह तथा अपने गोधन सहित श्री नंदीश्वर चले आये । यहाँ श्री कृष्ण बलराम ने अनेक लीलाएं की हैं और महादेव की अभिलाषा को पूर्ण किया है । स्थान : गोवर्धन से 16 मील पश्चिम-उत्तर कोणमें, कोसीसे 8 मील दक्षिण में तथा वृन्दावन से 28 मील पश्चिम में नन्दगाँव स्थित है ।
