ब्रज विलास तत्व

ब्रज विलास तत्व ब्रज रसिक श्री रघुनाथ दास गोस्वामी की रचना है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. ब्रज विलास स्तव - रघुनाथ दास गोस्वामी

    ओ! जब मैं ब्रज में गोवर्धन के ढलानों के चारों ओर घूमता हूं तो पागलपन मैं बार-बार पुकारता हूं, "हे राधे! हे कृष्ण! ", और जब कभी गोवेर्धन पर्वत पे ठोकरें खाकर और कभी-कभी जमीन पर बेहोश हो जाता हु तो मेरी आँखों के आंसुओं लगातार बाह जाते है

  2. वह समय कब आएगा - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, श्री ब्रज-विलास तत्व

    वह समय कब आएगा कि मैं ब्रज में रहूंगा? वृंदावन की कुंजों में भटकते हुए, भाव प्रेम से ओतप्रोत, मैं अपनी आँखों में राधा कृष्ण की छवि भर नित्य ही आंसू बहाऊंगा?