मधुराष्टकम् - महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य
(हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के इष्ट हैं श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।
श्री मधुराष्टकम् श्री कृष्ण माधुरी को समर्पित आठ पदों की रचना है जिसमें श्री कृष्ण के होठों, चेहरे एवं श्री कृष्ण से जुड़ी प्रत्येक माधुरी का वर्णन बहुत सुंदर ढंग से श्री वल्लभाचार्य ने किया है।
1 लेख उपलब्ध हैं
(हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के इष्ट हैं श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।