लीला नित्य विहार की श्री वृंदावन मांहि - श्री रूपरसिक देवाचार्य, माधुर्य माधुरी (10)
श्री नित्य विहार की लीला श्री धाम वृंदावन में ही संपन्न होती है जिसको श्री हरिप्रिया अर्थात् श्री राधा की कृपा के बिना कोई प्राप्त नहीं कर सकता ।
माधुर्य माधुरी श्री हरिव्यास देवाचार्य के शिष्य श्री रूप रसिक देवाचार्य की रचना है जिसमें श्री श्यामा श्याम के दिव्य माधुर्य रस को समर्पित तेईस दोहे हैं ।
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श्री नित्य विहार की लीला श्री धाम वृंदावन में ही संपन्न होती है जिसको श्री हरिप्रिया अर्थात् श्री राधा की कृपा के बिना कोई प्राप्त नहीं कर सकता ।