निरोधलक्षणम [श्री वल्लभाचार्य]

यहाँ निरोध का अर्थ है जब कोई भक्त भगवान कृष्ण के नियंत्रण में आता है। यह ग्रंथ महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य ने अपने दो भक्तों राजा और माधव दूबे के लिए लगभग 1510 ईस्वी में लिखा था। इसमें महाप्रभु ने निरोध को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है उसके उपदेश दिए हैं।

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