पञ्चपद्यानि [श्री वल्लभाचार्य]

श्रवण भक्ति भी भक्ति का मुख्य अंग है । इस रचना में श्री वल्लभाचार्य पांच प्रकार के श्रोताओं और भक्तों पर उनके विभिन्न प्रभावों की व्याख्या करते हैं।

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  1. श्रीकृष्णरसविक्षिप्त मानसा रतिवर्जिताः - महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य, पंचपदायनी (1)

    समस्त श्रोताओं में सर्वश्रेष्ठ वह है जिसका मन और हृदय सम्पूर्ण प्रकार से श्रीकृष्ण के प्रेममयी रस में डूबा हुआ है। वह केवल दिव्य प्रेम को स्वीकार करता है और उसे किसी भी सांसारिक या वैदिक सुखों का कोई स्वाद नहीं है।