आनंद की निधि साँवरो, सकल सुखनि को दानि - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रेम प्रकाश (48)
हे आनंद-निधि, समस्त सुखों के दाता श्री श्यामसुन्दर! मेरी यही प्रार्थना है कि आप किसी-न-किसी प्रकार से मुझसे अपना नित्य-सम्बन्ध बनाए रखें, अथवा हे मन! तू ही उनसे सम्बन्ध बनाए रख।
