प्रेम प्रकाश [ब्रज निधि ग्रंथावाली]

प्रेम प्रकाश निम्बार्क संप्रदाय के रसिक संत श्री ब्रज निधि द्वारा लिखित ब्रज निधि ग्रंथावली का चौथा अध्याय है। लेखक: श्री ब्रज निधि जी

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  1. आनंद की निधि साँवरो, सकल सुखनि को दानि - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रेम प्रकाश (48)

    हे आनंद-निधि, समस्त सुखों के दाता श्री श्यामसुन्दर! मेरी यही प्रार्थना है कि आप किसी-न-किसी प्रकार से मुझसे अपना नित्य-सम्बन्ध बनाए रखें, अथवा हे मन! तू ही उनसे सम्बन्ध बनाए रख।