सर्वोपर यह दिव्य वपु, श्री वृंदावन धाम - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, रासोत्सव लीला (24)
यह दिव्य वपु धारण किए श्री वृंदावन धाम सर्वोपरि है जो श्री श्यामा श्याम का नित्य विहार स्थल एवं रसिक जनों का विश्राम स्थल है ।
'रासोत्सव लीला' निकुंज केली माधुरी का सतरहवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें श्री श्यामाश्याम के रास लीला का वर्णन किया गया है।
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यह दिव्य वपु धारण किए श्री वृंदावन धाम सर्वोपरि है जो श्री श्यामा श्याम का नित्य विहार स्थल एवं रसिक जनों का विश्राम स्थल है ।