सार चंद्रिका

सार चंद्रिका ललित संप्रदाय के रसिक श्री किशोरी अली द्वारा लिखी गई है।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. जय जय भानुकुंवरि जय राधा अशरण शरण - श्री किशोरी अलि, सार चंद्रिका (1)

    अशरण को शरण प्रदान करने वाली भानुनंदिनी श्रीराधा की जय हो। हे प्यारीजू, अपने परम कृपालु विरद (ख्याति) को विचारते हुए, इस दीनजन की रक्षा करें।

  2. श्री हरिवंसी श्री हरिदासी सर्वोपरि रसरासी - श्री किशोरी अलि, सार चंद्रिका

    श्री हित हरिवंश महाप्रभु और श्री स्वामी हरिदास जी महाराज का रसोपासना-मार्ग सर्वोपरि हैं, जो दिव्य प्रेम-रस की राशि (पुंज) हैं। इसी प्रकार श्री विट्ठलविपुल देव, श्री हरिराम व्यास, श्री ध्रुवदास, श्री नागरीदास और श्री बिहारिनी दास जी आदि रसिक संत भी इसी रस-सिंधु के अनन्य उपासक हैं।

  3. जै जै रसिक उपासक जिनकी, पद रज मस्तक धारौं - श्री किशोरी अलि, सार चंद्रिका

    मैं रसिक संतों को प्रणाम करता हूँ और उनके चरण-कमलों की धूल अपने मस्तक पर धारण करता हूँ, क्योंकि उन्हीं की कृपा से मुझे नित्य किशोरी, श्री राधा महारानी की केलि-लीला का नित्य दर्शन प्राप्त हो रहा है।