मेरै माथै लागी ले धूरि गोबिंद चरनन की - श्री नामदेव जी
श्री नामदेव जी प्रेम-विह्वल होकर कहते हैं कि मेरे माथे पर गोविंद के चरणों की रज लगी है—वह रज जो देवता, मनुष्य और मुनिजनों के भी भाग्य में नहीं।
श्री नामदेव जी एक प्रसिद्ध संत और कवि थे।
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श्री नामदेव जी प्रेम-विह्वल होकर कहते हैं कि मेरे माथे पर गोविंद के चरणों की रज लगी है—वह रज जो देवता, मनुष्य और मुनिजनों के भी भाग्य में नहीं।