श्री प्यारी जी की गेंद लीला [निकुंज केली माधुरी]

'श्री प्यारी जी की गेंद लीला' निकुंज केली माधुरी का इक्कीसवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें फूलों से निर्मित गेंद द्वारा श्री श्यामाश्याम की गेंद लीला का वर्णन किया गया है।

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  1. प्यारे प्रेम भूमि श्री वृंदावन - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री प्यारी जी की गेंद लीला (23)

    अरे प्यारे, वृंदावन की भूमि प्रेम से ओतप्रोत है । यहाँ के जड़ और चेतन सभी प्रेमी जन ही हैं जो श्यामा श्याम के भाव रस में भरे हुए हैं । यहाँ न तो कोई साधक है न सिद्ध है, यहाँ सब ही कृपापात्र जन हैं ।