प्यारे प्रेम भूमि श्री वृंदावन - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री प्यारी जी की गेंद लीला (23)
अरे प्यारे, वृंदावन की भूमि प्रेम से ओतप्रोत है । यहाँ के जड़ और चेतन सभी प्रेमी जन ही हैं जो श्यामा श्याम के भाव रस में भरे हुए हैं । यहाँ न तो कोई साधक है न सिद्ध है, यहाँ सब ही कृपापात्र जन हैं ।
