श्री यमुनाष्टकम् [श्री हित हरिवंश महाप्रभु]

श्री यमुनाष्टकम् श्री हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा रचित है। इसमें श्री यमुना देवी की महिमा को समर्पित आठ छंद हैं।

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  1. श्री यमुनाष्टक - श्री हित हरिवंश महाप्रभु

    ब्रजराजनंदन श्री कृष्ण के मेघश्याम अंग पर अनुलेपित चन्दन की सुगंध को लेकर बहने वाली, बार-बार जन्म की कारण अविद्या को जला देने वाली, तीनों लोकों में फैले हुए निर्मल यश वाली, अमृत जैसे जल वाली तथा अति कठिनाई से नष्ट होने वाले मोह का नाश करने वाली कलिंदनंदिनी श्री यमुना जी का मैं भजन करता हूँ ।