श्रवण सुनें चहुँ ओर सों - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, युगलविहार शतक 2 (01)
मेरे श्रवण चारों ओर से केवल राधा-नाम की पुकार ही सुनें, और प्रत्येक क्षण नैननों में युगल विहार ही छाया रहे।
युगल विहार शतक श्री ललित किशोरी द्वारा रचित अभिलाष माधुरी का एक भाग है जिसमें उन्होंने युगल विहार को समर्पित 100 दोहों का संग्रह किया है । रचैयता: श्री ललित किशोरी
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मेरे श्रवण चारों ओर से केवल राधा-नाम की पुकार ही सुनें, और प्रत्येक क्षण नैननों में युगल विहार ही छाया रहे।