यह श्री राधा कृष्ण, युगल विहार स्थली है। यहाँ पर श्री राधा रानी ने श्री कृष्ण के नृत्य की परीक्षा ली थी। और श्री राधा रानी मान–गुमान की छड़ी को लेकर खड़ी थीं। श्री कृष्ण को नृत्य सिखा रही थीं। किन्तु जब नृत्य में कोई भूल हो जाती तो श्री राधा रानी उन्हें अपने रूप से भयभीत कर देतीं, श्री कृष्ण भय से नाच रहे हैं की उनसे कोई भूल न हो जाए । यह बहुत ही सुंदर लीला है।
रसिकवर श्री हरिराम व्यास जी ने इस लीला को अपने पद में इस प्रकार वर्णन किया है :
"पिय को नाचन सिखवत प्यारी,
मान गुमान लकुट लिए ठाड़ी, डरपत कुञ्ज बिहारी।”
श्री राधा रानी छड़ी को लेकर खड़ी हैं, की श्री कृष्ण से कोई भूल हो और उनको वो डाँट लंगाएं
"व्यास स्वामिनी की छबि निरखत, हंस हंस दे कर तारी।"
श्री हरिराम व्यास जी श्री राधा कृष्ण की अद्भुत लीला को देखकर खूब हंस हंस कर ताली बजा रहे हैं।

