(राग कान्हरो)
परम धन राधा नाम आधार।
जाकौ श्याम मुरली में टेरत, सुमिरत बारम्बार॥ [1]
जंत्र, मंत्र और वेद तंत्र में, सभी तार को तार।
श्री शुक, प्रगट कियौ नहीं यातें, जानी सार को सार॥ [2]
कोटिन रूप धरे नंदनंदन, तोउ न पायौ पार।
'व्यासदास' अब प्रगट बखानत, डारि भार में भार॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (38)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री राधा नाम ही हमारा परम धन है। जिस नाम को श्रीकृष्ण मुरली में गाते हैं और बार-बार सुमिरन करते हैं। [1]
परम धन राधा नाम आधार।
जाकौ श्याम मुरली में टेरत, सुमिरत बारम्बार॥ [1]
जंत्र, मंत्र और वेद तंत्र में, सभी तार को तार।
श्री शुक, प्रगट कियौ नहीं यातें, जानी सार को सार॥ [2]
कोटिन रूप धरे नंदनंदन, तोउ न पायौ पार।
'व्यासदास' अब प्रगट बखानत, डारि भार में भार॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (38)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री राधा नाम ही हमारा परम धन है। जिस नाम को श्रीकृष्ण मुरली में गाते हैं और बार-बार सुमिरन करते हैं। [1]
यंत्र, मन्त्र और वेद-तंत्र में जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती, वह नाम रहस्यों का भी परम रहस्य है। श्री शुकदेव परमहंस जी ने वेदों के सार का भी सार मानकर इसको प्रकट नहीं किया। [2]
श्रीकृष्ण कोटि रूप धारण करके भी श्री राधा नाम का पार नहीं पा सके। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि अब श्री राधारानी की ही कृपा जान, उन्होंने श्री राधा नाम प्रकट कर दिया; अब उन्हें किसी की कोई परवाह नहीं (सब भाड़ में जाए)। [3]

