गंध का अर्थ है सुगंध और इश्वरी का अर्थ देवी है। श्री राधा रानी जी को गंधेश्वरी भी कहाँ जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब श्री कृष्ण जी अपने दोस्तों के साथ घिरा हुऐ थे तो श्री राधा रानी जी के शरीर से निकलने वाली सुगंध से श्री कृष्ण जी मोहित हो गए, उनके हाथों से बांसुरी फिसल गई, और उनके सिर से मोर-पंख का मुकुट उसके चरणो (कमल सामान) पर गिर गया, और वह श्री कृष्ण जी बेहोश हो गये। इसलिए इस जगह को गंधेश्वरी तीर्थ के नाम से जाना जाता है। श्री राधा रानी जी को गांधीेश्वरी भी कहा जाता है। उस दिन से गंधर्व कुंड (राधा रानी के नाम पर नामित) श्री राधा कुंड के विजयी, मनोरंजक क्षणों का जश्न से मानते हैं। आज गंडेश्वरी गणेश्वरी नाम में बदल गया है।

गंधेश्वरी , ब्रज - दिव्य लीला
गंध का अर्थ है सुगंध और इश्वरी का अर्थ देवी है। श्री राधा रानी जी को गंधेश्वरी भी कहाँ जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब श्री कृष्ण जी अपने दोस्तों के साथ घिरा हुऐ थे तो श्री राधा रानी जी के शरीर से निकलने वाली सुगंध से श्री कृष्ण जी मोहित हो गए, उनके हाथों से बांसुरी फिसल गई, और उनके सिर से मोर-पंख का मुकुट उसके चरणो (कमल सामान) पर गिर गया, और वह श्री कृष्ण जी बेहोश हो गये। इसलिए इस जगह को गंधेश्वरी तीर्थ के नाम से जाना जाता है। श्री राधा रानी जी को गांधीेश्वरी भी कहा जाता है। उस दिन से गंधर्व कुंड (राधा रानी के नाम पर नामित) श्री राधा कुंड के विजयी, मनोरंजक क्षणों का जश्न से मानते हैं। आज गंडेश्वरी गणेश्वरी नाम में बदल गया है।
