पीली पोखर को लोग प्रिया कुंड कहते है । यहाँ पर श्री जी आती थीं, यह बरसाना में है। ये श्री जी (राधा रानी) का कुंड है। यहाँ की एक लीला है, स्वामी हरिदास जी ने गायी है। उनका पद है। श्री राधा रानी जी सरोवर में स्नान करने जा रही थीं। और उधर से नंदलाल आ जाते हैं। इतने में नंदलाल पूछते हैं। की यह किनकी बेटी हैं, इनका क्या नाम है? ये बड़ी ठाट भाट से चली आ रही हैं । ये सुनकर ललिता जी आगे बढ़ती हैं। और बोलीं की तुम इनका उत्तर मत देना। मै ही दे दूंगी।इनका इलाज तो मेरे पास है। ललिता जी बोली की नंदगाँव में तो बाँवरे ही रहते हैं, पागल ही रहते हैं। अरे बाँवरे तू अपने गाँव में वापस चले जा। अब श्याम सुन्दर चुप हो गए , यह तो बड़ा टेढ़ा बोली। अब क्या बोलते बिचारे एक ही प्रश्न में बड़ा उल्टा जवाब मिला। अब दूसरा प्रश्न करने की उनकी हिम्मत ही नहीं पड़ी। सब सखियाँ फिर खेलने लग गयीं। अब राधा रानी को प्रेम एवं कृपा करने कि इच्छा हुई कि श्याम सुन्दर के साथ बड़ा अन्याय हुआ। उन्होंने तो शिष्टाचार में यह पूछा कि यह किनकी बेटी है और यह जवाब देती हैं कि पागल तू अपने गाँव वापस जा। इतने में सखियाँ खेलने लगी तो श्रीजी बोली की तुम लोग खेलो मैं उधर नहाती हूँ। इतने में श्याम सुन्दर को भी अवसर मिल गया, इतनी दूर से आये हैं। वो श्याम सुन्दर भी तो टेड़ों में टेड़े हैं। और जैसे ही श्री जी ने पानी में डुबकी लगायी तुरंत श्याम सुन्दर ने पानी के भीतर से आकर के उनको गले लगा लिया, वो चौंक गयी। यह बहुत सुन्दर लीला है।
यहाँ की एक और लीला है कि राधा रानी ने हल्दी के पीले हाथ धोये थे और इसका नाम पीली पोखर हो गया था।

