शुकदेव जी परमहंस ब्रज लीला में श्री राधा रानी के बहुत ही विशेष तोते हैं । श्री राधा रानी उन्हे बहुत प्रेम करती हैं और हर समय उनका बहुत ख्याल रखती हैं। शुकदेव जी ,श्री कृष्ण को श्री राधा रानी की लीला सुनाते हैं और श्री राधा रानी को श्री कृष्ण की।शुकदेव जी ने अपने अवतार काल में कभी स्पष्ट रूप से 'राधा' नाम नहीं लिए।
श्रीराधानाम मात्रेण मूर्छाषाड्मासिकी भवेत्।
नोच्चारितमतः स्पष्टं परीक्षिद्धित कृन्मुनिः॥
संतजन यह भी बताते हैं कि, परीक्षित को श्रीमद्भागवत व्याख्यान के समय में अगर वे कभी स्पष्ट रूप से 'राधा' नाम लिए होते तो, वे छह महीने तक भाव समाधि मे लीन हो जाते। परन्तु उनको सात ही दिन मे श्री मद्भागवत व्याख्यान समाप्त करके परीक्षित का उद्धार करना था।
श्रीराधानाम मात्रेण मूर्छाषाड्मासिकी भवेत्।
नोच्चारितमतः स्पष्टं परीक्षिद्धित कृन्मुनिः॥
संतजन यह भी बताते हैं कि, परीक्षित को श्रीमद्भागवत व्याख्यान के समय में अगर वे कभी स्पष्ट रूप से 'राधा' नाम लिए होते तो, वे छह महीने तक भाव समाधि मे लीन हो जाते। परन्तु उनको सात ही दिन मे श्री मद्भागवत व्याख्यान समाप्त करके परीक्षित का उद्धार करना था।
इसलिए शुकदेव जी ने ‘राधा’ नाम की जगह अन्य नाम लिए एवं सही समय में श्री मद्भागवत व्याख्यान समाप्त करके परीक्षित का उद्धार किया।

