कोट वन ब्रज - दिव्य रासलीला

कोट वन ब्रज - दिव्य रासलीला


यह ठाकुर जी की गोचारण (गाय चराने) की भूमि है। एक बार, वह अपनी गायों को बुला रहे थे, उसी समय माता यशोदा वहां आ गईं। यशोदा मैया को जंगल से आने के कारण पसीना आ रहा था। तब ठाकुर जी ने कहा - माँ! इस कुंड के ठंडे पानी में स्नान क्यों नहीं करती ? कुंड को शीतल कुंड के रूप में जाना जाता है जहां मैया ने स्नान किया था।

उसी समय मैया ने रास दर्शन की इच्छा व्यक्त की, और ठाकुर जी ने मैया को रास लीला का दर्शन कराया है, कोट का अर्थ है किला, अतः कोट की ओट में से (छुप कर)  यशोदा जी को यहाँ रास बिहारी ने रास लीला का दर्शन कराया, जिससे गोपियों को भी संकोच नहीं हुआ और यशोदा जी की इच्छा की भी पूर्ति हई । अतः इस स्थल का नाम कोटवन हआ । ब्रज परिक्रमा करते हए श्री मन् चैतन्य देव भी यहाँ आये हैं, यहाँ उनकी बैठक भी है । यहाँ सूर्य कुंड, श्रीनाथ जी की बैठक एवं वल्लभाचार्य जी की बैठक भी है।

स्थान:
कोट वन दिल्ली-मथुरा राजमार्ग में कोसी और होलल के बीच में है।