एक बार श्री कृष्ण ने श्री राधा रानी से नृत्य करने को कहा, श्री राधा रानी ने कहा की नृत्य हम अवश्य करेंगे यदि आपने हमारे मोर को नृत्य में हरा दिया | बिहारी जी बोले ठीक है, और बीच में श्री राधा रानी अपनी अष्ट सखियों के साथ विराजमान हो गयीं, एक ओर बांके बिहारी और दूसरी ओर वो मोर। बहुत अद्भुत नृत्य हुआ। बांके बिहारी मोर बन कर नृत्य कर रहे हैं और मोर भी पंख फैला फैला कर नृत्य कर रहा है। श्री जी को लगा ये तो नटवर हैं, कहीं हमारे मोर को हरा न दें, तो श्री राधा रानी ने अपनी कृपामयी दृष्टि उस मोर पर डाल दी । उसके बाद उस मोर ने ऐसा नृत्य किया कि उसने बांके बिहारी को हरा दिया। क्योंकि किशोरी जी की उस मोर पर दृष्टि पड़ी थी इसलिए उसने बांके बिहारी को भी हरा दिया। उस मोर के बहुत शीघ्रता से नृत्य करने से उसका एक पंख भूमि पर गिर गया, और ठाकुर जी ने पंख को उठा लिया और श्री राधा रानी का प्रसाद समझ कर हमेशा हमेशा के लिए अपने मुकुट में धारण कर लिया ।
बोलिये अलबेली सरकार की जय।
बोलिये अलबेली सरकार की जय।

