श्री राधा रानी अपने तोते को सिर्फ श्री कृष्ण-श्री कृष्ण नाम जप करने को कहती थीं । श्री राधा का तोता ऐसा ही करता था। इन्हें देखकर दूसरे तोता भी कृष्ण-कृष्ण बोलने लगे। श्री राधा की सखियाँ और मंजरियाँ भी श्री कृष्ण-श्री कृष्ण कहने लगीं । पूरा नगर कृष्णमय हो गया, कोई श्री राधा रानी का नाम नहीं लेता था। पूरा वृन्दावन श्री कृष्ण श्री कृष्ण कहने लगा। एक दिन श्री कृष्ण उदास भाव से श्री राधा रानी से मिलने जा रहे थे। श्री राधा रानी, श्री कृष्ण की प्रतीक्षा कर रही थी। तभी मार्ग में नारद जी आ गए और श्री कृष्ण से मिलें । श्री राधा उन दोनों को देख कर छुप गयीं और उनकी बातें सुनने लगीं। नारद जी ने श्री कृष्ण को बताया कि पुरे वृन्दावन में श्री कृष्ण कृष्ण स्वर गूँज रहा है। श्री कृष्ण बोले “इसी कारण तो मै उदास हूँ, कोई भी श्री राधा नहीं कहता, जबकि मुझे श्री राधा नाम सुनकर प्रसन्नता होती है”। श्री कृष्ण के ऐसे वचन सुनकर श्री राधा रानी की आंखें भर आईं। महल लौटकर श्री राधा रानी ने तोते, सखियों और मंजरियों से कहा कि अब से आप राधा-राधा ही जपा कीजिए। उस समय से ही राधा का नाम पहले आता है फिर श्री कृष्ण का। श्री राधा ने यह विचार नहीं किया के लोग क्या कहेंगे, उन्होंने श्री कृष्ण के सुख के लिए अपने ही नाम का प्रचार करवा दिया । आज भी वृन्दावन में सभी श्री राधा रानी के नाम का गुणगान करते हैं और रसिक महापुरुषों ने तो यहाँ तक लिखा है कि "रा" अक्षर सुनते ही श्री कृष्ण विभोर हो जाते हैं और यदि कोई जीव "धे" कहता है तो श्री कृष्ण उस जीव के पीछे भागने लगते हैं।

श्री राधा रानी जी का नाम वृन्दावन का कण कण बोलता है
श्री राधा रानी अपने तोते को सिर्फ श्री कृष्ण-श्री कृष्ण नाम जप करने को कहती थीं । श्री राधा का तोता ऐसा ही करता था। इन्हें देखकर दूसरे तोता भी कृष्ण-कृष्ण बोलने लगे। श्री राधा की सखियाँ और मंजरियाँ भी श्री कृष्ण-श्री कृष्ण कहने लगीं । पूरा नगर कृष्णमय हो गया, कोई श्री राधा रानी का नाम नहीं लेता था। पूरा वृन्दावन श्री कृष्ण श्री कृष्ण कहने लगा। एक दिन श्री कृष्ण उदास भाव से श्री राधा रानी से मिलने जा रहे थे। श्री राधा रानी, श्री कृष्ण की प्रतीक्षा कर रही थी। तभी मार्ग में नारद जी आ गए और श्री कृष्ण से मिलें । श्री राधा उन दोनों को देख कर छुप गयीं और उनकी बातें सुनने लगीं। नारद जी ने श्री कृष्ण को बताया कि पुरे वृन्दावन में श्री कृष्ण कृष्ण स्वर गूँज रहा है। श्री कृष्ण बोले “इसी कारण तो मै उदास हूँ, कोई भी श्री राधा नहीं कहता, जबकि मुझे श्री राधा नाम सुनकर प्रसन्नता होती है”। श्री कृष्ण के ऐसे वचन सुनकर श्री राधा रानी की आंखें भर आईं। महल लौटकर श्री राधा रानी ने तोते, सखियों और मंजरियों से कहा कि अब से आप राधा-राधा ही जपा कीजिए। उस समय से ही राधा का नाम पहले आता है फिर श्री कृष्ण का। श्री राधा ने यह विचार नहीं किया के लोग क्या कहेंगे, उन्होंने श्री कृष्ण के सुख के लिए अपने ही नाम का प्रचार करवा दिया । आज भी वृन्दावन में सभी श्री राधा रानी के नाम का गुणगान करते हैं और रसिक महापुरुषों ने तो यहाँ तक लिखा है कि "रा" अक्षर सुनते ही श्री कृष्ण विभोर हो जाते हैं और यदि कोई जीव "धे" कहता है तो श्री कृष्ण उस जीव के पीछे भागने लगते हैं।
