भक्त अपराध - श्री रूप गोस्वामी और कृष्ण दास जी से सम्बंधित

भक्त अपराध - श्री रूप गोस्वामी और कृष्ण दास जी से सम्बंधित

रूप गोस्वामी पर श्री राधा कृष्ण की कृपा, निरंतर बढती ही जा रही थी | वे भगवान् की दिव्य लीलाओं का दर्शन करते थे | एक बार कृष्ण दास नाम के वैष्णव भक्त जो पैर से लंगड़े थे, उनके पास सत्संग के लिए आये | उस समय रूप गोस्वामी राधा कृष्ण की एक दिव्य लीला के दर्शन कर रहे थे | लीला में राधा एक वृक्ष की डाल से फूल तोड़ने का प्रयास कर रही थी| डाल कुछ ऊंची थी | वह उचक उचक कर उसे पकड़ना चाह रही थी परन्तु डाल हाथ में नही आ रही थी | श्याम सुन्दर दूर से देख रहे थे| वे चुपके से आये और राधा रानी के पीछे से डाल को पकड़ कर धीरे धीरे इतना नीचे कर दिया कि वह उनकी पकड़ में आ जाये | राधा रानी ने जैसे ही डाल पकड़ी श्याम सुन्दर ने उसे छोड़ दिया | राधा रानी वृक्ष से लटक कर रह गयीं | यह देखकर रूप गोस्वामी को हंसी आ गयी परन्तु कृष्ण दास समझे कि वे उनका लंगड़ापन देखकर हंस दिए | वे क्रुद्ध होकर वहां से चले गये | रूप गोस्वामी को इसका कुछ भी पता नही था | अकस्मात् उनकी लीला स्फूर्ति बंद हो गयी | अब बिना लीला के उनके प्राण छटपटाने लगे पर वे समझ न सके ऐसा क्यों हुआ | वे सनातन गोस्वामी के पास गये | सनातन गोस्वामी ने उन्हें कहा अवश्य कोई वैष्णव अपराध हुआ है | रूप गोस्वामी बोले जानबूझकर तो मैंने कोई अपराध नही किया | अनजाने में हुआ है तो कैसे पता चले? सनातन गोस्वामी ने परामर्श दिया की तुम वैष्णव सेवा का आयोजन कर सभी वैष्णवों को आमंत्रित करो | जो वैष्णव उसमे न आये समझ लेना उसी के प्रति अपराध हुआ है | रूप गोस्वामी ने ऐसा ही किया | कृष्णदास बाबा ने निमंत्रण स्वीकार नही किया तथा निमंत्रण देने आये व्यक्ति से उन्होंने वह घटना भी बताई | रूप गोस्वामी ने जाकर उनसे क्षमा मांगी और उस दिन की अपनी हंसी का कारण बताया तब बाबा संतुष्ट हुए और फ़िर से लीला स्फूर्ति होने लगी | नाम अपराध के बारे में महाप्रभु ने कहा है- भक्ति एक सुकोमल लता के समान है और वैष्णव अपराध मत्त हाथी के समान है, वैष्णव अपराध भक्ति लता को समूल उखाड़ फेकने का सामर्थ्य रखता है | इसलिए साधक रुपी माली को उसे यत्न से ढक कर और अपराध रुपी हाथी से बचा कर रखना चाहिए |