ब्रज रस का स्वाद - ब्रज वृंदावन का आनंद

ब्रज रस का स्वाद - ब्रज वृंदावन का आनंद


नारद जी ने हमेशा उल्लेख किया है कि ब्रज की गोपियां प्रेम की ध्वजा हैं । यहां पर एक मनमोहक घटना है। नारद जी ने एक बार यमुना नदी के तट पर गोपी को ध्यान में लीन देखा। जब उन्होंने अपनी आँखें खोली, तो नारद जी ने पूछा - हे माँ! आप इतने लंबे समय तक ध्यान में रही हैं। क्या श्री कृष्ण आपके ईश्वर (भगवान) हैं? क्या आपका लक्ष्य उन्ही को प्राप्त करना है?

गोपी ने गुस्से में उत्तर दिया - उसका नाम मेरे सामने मत लो। मैं उससे अपने ह्रदय को छुटकारा दिलाने का प्रयास कर रही थी। वह बहुत उपद्रवी है। वह मुझे अपना काम नहीं करने देता है। वह मेरे ह्रदय में आता है तो मैं अपना काम भूल जाती हूं। जब मेरी रोटी जल जाती है तो मेरे पति और मेरी सास मुझ पर क्रोध करते हैं । मैं उसे अपने मन से बाहर निकालना चाहती हूँ।
नारद जी ने उनसे कहा : "प्रिय माँ, आप परम धन्य हैं|  जो परमहंस कई वर्षों से ध्यान में केवल श्री कृष्ण का एक बार दर्शन पाना चाहते हैं, वो उनके ही ध्यान में नहीं आते | और आपको देखिये, आप उनसे छुटकारा पाने के लिए ध्यान कर रहीं हैं। यह केवल ब्रज में ही संभव है, कहीं और नहीं! "
ब्रज रस और ब्रज रस की महिमा!