आध्यात्मिक गुरु का पालन अक्षरश: पालन करें

आध्यात्मिक गुरु का पालन अक्षरश: पालन करें


जब वेदव्यास जी ने चारो वेद पूर्ण रूप से लिख लिए थे, तब उन्होंने आत्मनिरीक्षण किया | तब उन्हें अपने भीतर परमांनद (बृज रस) की कमी अनुभव हुई | वो बिना श्री राधा कृष्ण के अपने भीतर शुष्क मरू भूमि (रेगिस्तान) अनुभव कर रहे थे | एक बार वेदव्यास जी के गुरु नारद जी उनके आश्रम पर पधारे | तो उन्होंने अपने गुरु नारद जी से पूछा, मैं अपने भीतर बहुत शुष्क मरू भूमि (रेगिस्तान) की तरह क्यों अनुभव कर रहा हूँ, जबकि मैंने पहले से कई बड़े शास्त्र और ग्रन्थ लिखी हैं, जो ज्ञान से परिपूर्ण है।

नारद जी कहने लगे, इस बात से कोई मतलब नहीं है की आपने कितना ज्ञान प्राप्त किया है और कितना ज्ञान लिखा है । जब तक की आपको राधाकृष्ण का प्रेम प्राप्त नहीं हो जाता तब तक आप आपने भीतर शुष्क मरू भूमि (रेगिस्तान) जैसा ही अनुभव करेंगे | "अब मैं आपको आदेश देता हूँ, आप राधाकृष्ण के प्रेम के विषय में लिखे | जब आप उनकी ब्रज लीलाओं का वर्णन करेंगे तो वो आपके शुष्क मरू भूमि (रेगिस्तान) वाले मन के लिए वर्षा का काम करेंगी | आपकी बुद्धि शुद्ध हो जाएगी |" तब वेदव्यासजी ने सब ग्रंथो का सार श्रीमद भागवतम की रचना की  | अंत में उनके गुरु के कथनानुसार उन्हें श्री राधाकृष्ण का प्रेम प्राप्त हुआ | 
यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझने के लिए यह है कि जब तक कोई आध्यात्मिक गुरु के निर्देशों का पालन न करे, तब तक कोई अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो पाता ।