ध्यान घनश्याम का दीवाना बना देता है - बिंदु जी

ध्यान घनश्याम का दीवाना बना देता है - बिंदु जी

ध्यान घनश्याम का दीवाना बना देता है,
बागे दुनिया को भी वीराना बना देता है। [1]
बिहार साँवले सरकार का मेरे दिल को,
कभी गोकुल कभी बरसाना बना देता है॥ [2]
शमाए इश्क ने तेरे यूं दिल को किया रोशन,
दीनों दुखियों को परवाना बना देता है। [3]
प्रेम-प्याले जो पीयें भरके वो अपनी जाने,
‘बिन्दु’ को बिन्दु ही मस्ताना बना देता है॥ [4]
- श्री बिंदु जी

घनश्याम श्रीकृष्ण का चिंतन करने से दिव्य अनुभूति होती है तथा दृश्य प्रपंच की सत्ता समाप्त हो जाती है। [1]

उनकी स्मृति कभी इस हृदय को गोकुल (श्रीकृष्ण जन्मस्थान) के आनंद से परिपूर्ण कर देती है, तो कभी बरसाना (श्रीराधा जन्मस्थान) के माधुर्य-आनंद से आप्लावित कर देती है। [2]

तुम्हारे प्रेम ने मेरे हृदय को इस प्रकार प्रकाशमान कर दिया है कि मुझ जैसे दीन-दुःखी को भी भयरहित बना दिया है। [3]

श्री बिंदु जी कहते हैं— जो भक्त आपके दिव्य प्रेमामृत का भरपूर पान करते हैं, उनकी दशा तो वही जानें; परंतु मुझे तो आपके प्रेम की एक बूँद ने ही मदमत्त कर रखा है। [4]