हमारो धन राधा राधा राधा - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (83)

हमारो धन राधा राधा राधा - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (83)

हमारो धन राधा राधा राधा।
मेरी धन संपत्ति एकमात्र श्री राधा हैं।

प्राण धन राधा राधा राधा।
मेरी प्राण धन एकमात्र श्री राधा हैं।

जीवन धन राधा राधा राधा।
मेरी जीवन धन एकमात्र श्री राधा हैं।

श्री राधे जू की शरण न एकहूं बाधा।
मैं श्री राधा जू की शरण मे हूँ, इसीसे मेरे लिए अब कोई बाधा नहीं है।

श्री राधे जू हैं छवी निधि प्रेम अगाधा।
श्री राधा जू सुंदरता, निधि तथा प्रेम की अगाध सागर हैं।

श्री राधे बिनु चैन न पल छिन आधा।
श्री राधा जू के बिना मुझे आधा पल भी चैन नहीं है।

श्री राधावर भाजत नाम सुनी राधा।
श्री राधा जू का नाम सुनते ही श्री कृष्ण दौड़ते हुये आ जाते हैं।

श्री राधे बिनु ब्रह्मा श्याम रस आधा।
श्री राधा के बिना पूर्ण ब्रम्ह श्री कृष्ण भी आधे हैं।

श्री राधे जू हैं माधव, माधव राधा।
श्री राधा ही कृष्ण हैं एवं श्री कृष्ण ही राधा हैं।

मुरली महँ गावत हरि गुन राधा।
श्री कृष्ण अपनी मुरली से सदैव राधा नाम ही गाते हैं।

कृष्ण कहु पाछे प्रथम कहु राधा।
श्री कृष्ण के पहले श्री राधा नाम ही कहूँगा।

श्री राधा तजि भजत श्याम अपराधा।
श्री राधा के बिना श्री कृष्ण का भजन भी अपराध है।

- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (83)