जय श्री वृषभानु दुलार की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (100)

जय श्री वृषभानु दुलार की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (100)

जय श्री वृषभानु दुलार की, जय अलबेली सरकार की।
वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी की जय। अलबेली सरकार की जय।

जय स्वामिनी नंदकुमार की, जय अधाधुंद दरबार की।
नंदकुमार श्री कृष्ण द्वारा सेवित स्वामिनी की जय। जिनकी दया का भण्डार कभी समाप्त नहीं होता उन दयामयी की जय हो।

जय अति भोरी सुकुमार की, जय करुणा की भण्डार की।
अत्यंत सुकुमारी एवं भोरी श्री राधा रानी की जय। असीम करुणामयी राधा रानी को शत शत नमन।

जय महाभाव सरकार की, जय निराधार आधार की।
महाभाव स्वरूपिणी की जय। आश्रयहीनों की आश्रय श्री राधा की जय।

जय शक्ति ह्लादिनी सार की, जय मूरत रूप सिंगार की।
आह्लादिनी शक्ति के सार की जय। सौंदर्य और श्रृंगार की प्रतिमूर्ति की जय।

जय दीनन की रखवार की, जय पतितन की पतवार की।
दीन जनों के रक्षक की जय। पतितों को पावन करनेवाली की जय।

जय प्रेम रूप रस सार की, जय छवि सोरह सिंगार की।
प्रेम, सौंदर्य और रस की सार श्री राधा की जय। सोलह श्रृंगार धारिणी की जय।

जय मम कृपालुसरकार की, जय सखियन प्राणाधार की।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं कि मेरी दयालु स्वामिनी की जय हो। सखियों के प्राणाधार की जय।

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (100)